बुनकरों और महिला समूहों को 9.41 करोड़ का भुगतान, दीपावली से पहले मिली बड़ी राहत
रायपुर, 05 नवंबर 2026।
दीपावली से पहले छत्तीसगढ़ के बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए खुशियों की सौगात आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा और ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव के निर्देश पर राज्य सरकार ने बुनाई और गणवेश सिलाई कार्य से जुड़े हितग्राहियों को 9 करोड़ 41 लाख रुपये का पारिश्रमिक जारी किया है। यह राशि आरटीजीएस के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। समय पर भुगतान से हजारों बुनकरों और महिलाओं को आर्थिक राहत मिली है और उनके परिवारों की दीपावली की खुशियां बढ़ी हैं।
स्थानीय हुनर को रोजगार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता : गजेन्द्र यादव
ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को उनके परिश्रम का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्थानीय कौशल को रोजगार से जोड़कर बुनकरों और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। दीपावली से पहले पारिश्रमिक मिलने से इन परिवारों को त्योहार की तैयारियों में सहूलियत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के अनुरूप बुनाई और गणवेश सिलाई के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। महिलाओं के कौशल विकास, स्वरोजगार और आय में वृद्धि के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है।
302 बुनकर समितियों और 128 महिला समूहों को मिला भुगतान
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने बताया कि पारिश्रमिक का भुगतान पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में किया गया है। अक्टूबर 2026 में प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को 7 करोड़ 60 लाख रुपये जारी किए गए। इसके अतिरिक्त 3 नवंबर को 49 बुनकर सहकारी समितियों को 1 करोड़ 50 लाख रुपये तथा 128 महिला स्व-सहायता समूहों को 31 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
चालू वित्तीय वर्ष में 76.13 करोड़ रुपये का भुगतान
राज्य हाथकरघा संघ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर तक कुल 76 करोड़ 13 लाख 54 हजार रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। इसमें 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 54 करोड़ 87 लाख रुपये तथा 2,005 महिला स्व-सहायता समूहों को गणवेश सिलाई के लिए 21 करोड़ 17 लाख रुपये दिए गए हैं।
बुनकर परिवारों को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन
हाथकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों के कल्याण के लिए भी विभाग द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है। आकस्मिक मृत्यु के मामलों में 29 बुनकरों के आश्रित परिवारों को 5 लाख 80 हजार रुपये का सहायता अनुदान दिया गया है। वहीं, हाथकरघा क्षेत्र के 11 पुरस्कार प्राप्त हितग्राहियों को 3 लाख 74 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।
पुनर्वासित महिलाओं को प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने की पहल
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर जिलों की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
इस पहल के तहत राज्य हाथकरघा संघ के अनुपयोगी एवं कटपीस कपड़ों का उपयोग कर आकर्षक खिलौने, बैग और वाटर बैग जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार करवाए जाएंगे। इसके लिए महिलाओं को कार्यादेश दिए जा रहे हैं। साथ ही, उन्हें घर पर ही निःशुल्क सिलाई मशीन उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे अपने स्तर पर काम शुरू कर नियमित आय अर्जित कर सकें।
राज्य सरकार की ये पहलें पारंपरिक हस्तकला और स्थानीय कौशल को बढ़ावा देने के साथ बुनकरों एवं महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। समयबद्ध पारिश्रमिक भुगतान, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसरों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है।
