हिंदू, मुस्लिम और ईसाई रीति-रिवाज से होंगे विवाह, कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की शुरुआत

रायपुर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज एक ऐतिहासिक और भव्य सामाजिक आयोजन होने जा रहा है। शहर में 1316 जोड़ों का सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें अलग-अलग धर्मों के जोड़े अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह बंधन में बंधेंगे। इस आयोजन की खास बात यह है कि यहां हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय के विवाह संस्कार एक ही मंच पर संपन्न होंगे।

इसी कार्यक्रम के साथ राज्य सरकार द्वारा कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की भी औपचारिक शुरुआत की जा रही है, जिससे यह आयोजन केवल विवाह समारोह तक सीमित न रहकर सामाजिक जागरूकता का बड़ा मंच बन गया है।

सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण

सामूहिक विवाह कार्यक्रम को सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक माना जा रहा है। अलग-अलग धर्मों के जोड़ों का एक साथ विवाह होना यह संदेश देता है कि समाज में विविधता के बावजूद साझी संस्कृति और सहयोग संभव है।

आयोजकों के अनुसार:

  • प्रत्येक धर्म के लिए अलग-अलग विवाह स्थल और पंडाल बनाए गए हैं

  • धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का पूरा सम्मान रखा गया है

  • विवाह की सभी व्यवस्थाएं पहले से तय मानकों के अनुसार की गई हैं

इससे प्रतिभागी परिवारों में संतोष और भरोसे का माहौल देखने को मिल रहा है।

1316 जोड़ों को मिलेगा सामाजिक और आर्थिक सहारा

इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देना है। विवाह जैसे बड़े सामाजिक आयोजन में होने वाले खर्च को कम करने के लिए यह योजना बेहद कारगर मानी जाती है।

प्रत्येक जोड़े को:

  • गृहस्थी के उपयोग का आवश्यक सामान

  • सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी

  • सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं का लाभ

प्रदान किया जा रहा है। इससे नवविवाहित जोड़ों को नए जीवन की शुरुआत में सहयोग मिलेगा।

भव्य आयोजन की तैयारियां पूरी

रायपुर में आयोजित इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। आयोजन स्थल पर:

  • विशाल पंडाल और बैठने की व्यवस्था

  • पेयजल, चिकित्सा और सुरक्षा के इंतज़ाम

  • स्वयंसेवकों और प्रशासनिक अमले की तैनाती

की गई है। आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया गया है।

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की शुरुआत

इस कार्यक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू है कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की शुरुआत। इस अभियान का उद्देश्य:

  • बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या को कम करना

  • पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना

  • सरकारी पोषण योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाना

विशेषज्ञों के अनुसार, सामाजिक आयोजनों के माध्यम से इस तरह के अभियानों की शुरुआत करने से जनभागीदारी बढ़ती है और संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचता है।

स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष संदेश

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े संदेश भी दिए जाएंगे।

  • संतुलित आहार के महत्व पर जानकारी

  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं की जानकारी

  • कुपोषण से बचाव के उपाय

इन प्रयासों का उद्देश्य विवाह समारोह के साथ-साथ समाज में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।

प्रशासन और समाज की संयुक्त पहल

यह आयोजन प्रशासन और समाज के सहयोग से संभव हो पाया है। अधिकारियों का कहना है कि:

  • सामूहिक विवाह सामाजिक सुधार का प्रभावी माध्यम है

  • इससे फिजूलखर्ची पर रोक लगती है

  • समाज में समानता और सहयोग की भावना मज़बूत होती है

सामाजिक संगठनों ने भी इस पहल को सराहनीय बताया है और भविष्य में ऐसे और कार्यक्रमों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है।

परिवारों और जोड़ों में उत्साह

विवाह में शामिल होने वाले जोड़ों और उनके परिवारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कई परिवारों का कहना है कि:

  • इस आयोजन से आर्थिक बोझ कम हुआ

  • सम्मानपूर्वक विवाह संपन्न हो रहा है

  • सरकारी और सामाजिक सहयोग से आत्मविश्वास बढ़ा है

यह कार्यक्रम उनके लिए यादगार बनता जा रहा है।

रायपुर के लिए विशेष महत्व

रायपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में इतने बड़े पैमाने पर सामूहिक विवाह का आयोजन सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे:

  • शहर की सामाजिक पहचान मजबूत होती है

  • सकारात्मक संदेश पूरे राज्य में जाता है

  • सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा मिलता है

रायपुर में आयोजित 1316 जोड़ों का सामूहिक विवाह कार्यक्रम केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि समरसता, सहयोग और जागरूकता का संदेश है। हिंदू, मुस्लिम और ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह और साथ ही कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की शुरुआत इस कार्यक्रम को विशेष बनाती है।

यह पहल दिखाती है कि जब सरकार और समाज मिलकर काम करते हैं, तो बड़े सामाजिक बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ के सामाजिक विकास को नई दिशा दे सकते हैं।