रायगढ़ कार्बन प्लांट हादसा हादसे में 9 महीने की बच्ची की मौत, 6 घायल रायपुर में भर्ती; परिजनों ने दबाव के आरोप लगाए
रायगढ़।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित एक कार्बन प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 9 महीने की मासूम बच्ची की मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
हादसे के बाद मृत बच्ची के परिजनों ने प्रबंधन और प्रशासन पर दबाव बनाने और मामले को दबाने के आरोप लगाए हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
कैसे हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रायगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कार्बन प्लांट में अचानक तकनीकी गड़बड़ी या विस्फोट जैसी स्थिति बनी।
- प्लांट के एक हिस्से में तेज धमाके की आवाज़ सुनाई दी
- आसपास काम कर रहे कर्मचारी और वहां मौजूद परिवार के लोग चपेट में आ गए
- अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाकर बाहर की ओर भागे
हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
9 महीने की बच्ची की दर्दनाक मौत
हादसे में सबसे दर्दनाक पहलू 9 महीने की मासूम बच्ची की मौत है। बच्ची गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल ले जाई गई, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों का कहना है कि:
- हादसे के तुरंत बाद उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिली
- समय पर इलाज होता तो शायद बच्ची की जान बच सकती थी
इस घटना से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
6 घायलों का रायपुर में इलाज
हादसे में घायल हुए छह लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रायपुर रेफर किया गया।
डॉक्टरों के अनुसार:
- कुछ घायलों को जलने और अंदरूनी चोटें आई हैं
- दो की हालत नाजुक बनी हुई है
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा है
स्वास्थ्य विभाग ने घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता देने की बात कही है।
परिजनों के गंभीर आरोप
मृत बच्ची और घायलों के परिजनों ने प्लांट प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि:
- हादसे के बाद समझौते का दबाव बनाया गया
- मुआवजे के नाम पर चुप कराने की कोशिश हुई
- घटना की जानकारी छिपाने का प्रयास किया गया
परिजनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची।
- क्षेत्र को सील कर दिया गया
- प्लांट की गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोका गया
- पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की
प्रशासन का कहना है कि:
- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
- जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी
औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- कई प्लांटों में सुरक्षा ऑडिट नियमित नहीं होता
- श्रमिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जाता
- आपातकालीन व्यवस्था अक्सर नाकाफी होती है
इस तरह की घटनाएं औद्योगिक विकास की कीमत पर हो रही लापरवाही को उजागर करती हैं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
- लोगों ने प्लांट प्रबंधन के खिलाफ नाराज़गी जताई
- सुरक्षा व्यवस्था की मांग की
- पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की अपील की
कुछ सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मुआवजा और सहायता की मांग
परिजनों और स्थानीय लोगों ने सरकार से:
- मृत बच्ची के परिवार को उचित मुआवजा
- घायलों के इलाज का पूरा खर्च
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम
उठाने की मांग की है।
आगे क्या हो सकता है
सूत्रों के मुताबिक:
- फैक्ट्री की तकनीकी जांच रिपोर्ट जल्द सामने आ सकती है
- सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी
- लापरवाही पाए जाने पर प्रबंधन पर एफआईआर दर्ज हो सकती है
इस मामले पर राज्य स्तर पर भी नजर रखी जा रही है।
रायगढ़ कार्बन प्लांट में हुआ यह हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। 9 महीने की मासूम बच्ची की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। घायलों का इलाज जारी है और परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं।
अब यह प्रशासन और जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि सच्चाई सामने लाई जाए, दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
