झारखंड में छात्र प्रदर्शन पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा का राज्यव्यापी ‘झारखंड बंद’
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे छात्र और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों (JPSC-JSSC) पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल के विरोध में विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक छात्र एवं प्रदर्शनकारी घायल हो गए। घटना के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और अन्य छात्र संगठनों के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आज पूरे झारखंड में बंद का आह्वान किया है।
क्या है पूरा मामला?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर हजारों छात्र लंबे समय से आंदोलनरत हैं। सोमवार को ‘JPSC-JSSC सुधार मंच’ और छात्र संघों के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने झारखंड विधानसभा घेराव का आह्वान किया था।
जैसे ही प्रदर्शनकारी छात्र बैरिकेड्स तोड़कर विधानसभा भवन की ओर बढ़ने लगे, सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई दौर के आंसू गैस के गोले छोड़े, वाटर कैनन का उपयोग किया और लाठीचार्ज कर दिया। इस कार्रवाई में दर्जनों छात्र, छात्राएं और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
भाजपा का ‘झारखंड बंद’ और सियासी हलचल
लाठीचार्ज की घटना के तुरंत बाद भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगाया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए आज पूरे राज्य में सांकेतिक एवं पूर्ण बंद का आह्वान किया। बंद के आह्वान को देखते हुए राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
छात्रों की मुख्य मांगें
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परीक्षाओं की CBI जांच: JSSC-CGL और JPSC परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों की पारदर्शी सीबीआई जांच कराई जाए।
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परीक्षा रद्द करने की मांग: संदिग्ध और विवादास्पद परीक्षाओं को तुरंत रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष आयोजन कराया जाए।
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लाठीचार्ज के दोषियों पर कार्रवाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और छात्राओं पर बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
राज्य में बने इस तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है, जबकि छात्र संगठन अपनी मांगों पर डटे रहने की बात कह रहे हैं।
