ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता: इजराइल और लेबनान के बीच शांति की रूपरेखा तैयार, समझौते के बाद भी नेतन्याहू के कड़े तेवर
यरूशलेम/बेरूत। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी दशकों पुराने तनाव के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक कामयाबी सामने आई है। पांच दौर की बेहद लंबी और जटिल वार्ताओं के बाद, अमेरिका के समर्थन से इजराइल, लेबनान और अमेरिका ने एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय शांति फ्रेमवर्क (Trilateral Peace Framework) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते को क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
नेतन्याहू का बड़ा फैसला: दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी इजराइली सेना
शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बावजूद इजराइल के रुख में सख्ती बरकरार है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए साफ कर दिया है कि:
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इस शांति समझौते के वजूद में आने के बाद भी सुरक्षा कारणों से इजराइल दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी को पूरी तरह बनाए रखेगा।
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इजराइल अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं करेगा।
हिजबुल्लाह की ‘गृहयुद्ध’ की खुली चेतावनी
इस ऐतिहासिक समझौते के सामने आने के बाद लेबनान के भीतर अंदरूनी संकट और गहराने के आसार नजर आ रहे हैं:
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शांति फ्रेमवर्क के तहत क्षेत्र के गैर-राज्य सशस्त्र समूहों (Non-State Armed Groups) को पूरी तरह से निःशस्त्र (Disarm) करने की शर्तें रखी गई हैं।
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इन शर्तों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आतंकवादी संगठन हिजबुल्लाह ने लेबनान में ‘गृहयुद्ध’ (Civil War) शुरू होने की खुली चेतावनी दे डाली है।
शांति बहाली की राह में अभी भी चुनौतियाँ
बड़ा विश्लेषण: अमेरिका के मध्यस्थता प्रयासों से कागजों पर तो शांति की रूपरेखा तैयार हो गई है, लेकिन जमीन पर इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। हिजबुल्लाह के आक्रामक रुख और दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना की निरंतर मौजूदगी के कारण इस पूरे क्षेत्र में पूर्ण युद्धविराम और दीर्घकालिक शांति को लेकर फिलहाल संकट के बादल पूरी तरह छंटे नहीं हैं।
