इज़राइल में राजनीतिक सरगर्मी तेज: 27 अक्टूबर को होंगे आम चुनाव, बेंजामिन नेतन्याहू की साख दांव पर; 50 साल में पहली बार पूरा हुआ कार्यकाल

यरूशलम/तेल अवीव: पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच इज़राइल से एक बहुत बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। इज़राइल में आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी गई है कि देश में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव (Knesset Elections) कराए जाएंगे। इज़राइल के हालिया इतिहास में यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य और उनकी नीतियों का फैसला करेगा।

50 साल में पहली बार: सरकार ने पूरा किया 4 साल का कार्यकाल

इज़राइल के चुनावी इतिहास में यह घोषणा बेहद खास है। साल 1988 के बाद यह पहली बार हो रहा है जब इज़राइल में चुनाव अपने तय समय (Schedule) पर होने जा रहे हैं।

  • इज़राइल की संसद (Knesset) 17 जुलाई को भंग हो जाएगी, जिससे चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत होगी।

  • बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली यह गठबंधन सरकार पिछले 50 से अधिक वर्षों में अपना पूरा 4 साल का कार्यकाल समाप्त करने वाली पहली सरकार बनने जा रही है। इससे पहले इज़राइल में गठबंधन टूटने के कारण अक्सर समय से पहले ही चुनाव होते रहे हैं।

नेतन्याहू के राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन परीक्षा

76 वर्षीय बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी और कठिन लड़ाई मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में मतदाता मुख्य रूप से इन बड़े मुद्दों पर अपना फैसला सुनाएंगे:

  1. 7 अक्टूबर 2023 के सुरक्षा फेलियर: हमास के औचक हमले को रोकने में रही खुफिया नाकामी।

  2. युद्ध का संचालन: गाज़ा, लेबनान और हाल ही में ईरान के साथ हुए सीधे सैन्य टकराव में सरकार की रणनीति।

  3. घरेलू मुद्दे: नेतन्याहू पर चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे और देश में चल रहे न्यायिक सुधारों को लेकर उपजा जनाक्रोश।

चुनौती बनकर उभरे पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट

ओपिनियन पोल्स (Opinion Polls) के अनुसार, नेतन्याहू की ‘लिकुड पार्टी’ (Likud Party) को इस बार कड़ी टक्कर मिल रही है। इज़राइल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट (Gadi Eisenkot) की ‘याशर पार्टी’ (Yashar Party) और पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट व यायर लापिड का गठबंधन नेतन्याहू के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे में 27 अक्टूबर को होने वाले मतदान से यह साफ होगा कि इज़राइल की सत्ता की कमान दोबारा नेतन्याहू के पास रहेगी या देश को नया नेतृत्व मिलेगा।