ईरान युद्ध से दुनिया में महंगाई बढ़ी, तेल कंपनियों ने कमाए अरबों डॉलर; कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी, 5 अगस्त 2026। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिला है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर खतरा बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिसका असर दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल, माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ा। जहां आम लोग बढ़ती महंगाई से परेशान रहे, वहीं दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों ने इस संकट के दौरान रिकॉर्ड मुनाफा कमाया।

विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव के दौरान जब तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ती है, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। इसका सीधा फायदा तेल उत्पादन और बिक्री करने वाली कंपनियों को मिलता है। दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों में दुनिया की छह प्रमुख तेल कंपनियों ने कई वर्षों का सर्वाधिक मुनाफा दर्ज किया है।

होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद से बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली। अमेरिकी WTI क्रूड करीब 5 प्रतिशत गिरकर 76.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।

ट्रम्प की ईरान को चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट जल्द खोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर चुका था, लेकिन ईरान की ओर से बातचीत के संकेत मिलने के बाद उसे फिलहाल टाल दिया गया।

साथ ही ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

ईरान का अमेरिका पर आरोप

ईरान ने आरोप लगाया है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ओमान के साथ प्रस्तावित समझौता अमेरिका की सैन्य धमकियों और हस्तक्षेप के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका सैन्य दबाव बनाए रखेगा, तब तक किसी स्थायी समझौते तक पहुंचना मुश्किल होगा।

अमेरिका के मिसाइल भंडार पर रिपोर्ट

CNN की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष के दौरान अमेरिका अपने THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लगभग 80 प्रतिशत इंटरसेप्टर और पैट्रियट सिस्टम के करीब आधे इंटरसेप्टर का उपयोग कर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, हथियारों के तेजी से घटते भंडार के कारण अमेरिका बड़े सैन्य अभियान को लेकर सतर्क रुख अपना रहा है।

भारतीय जहाज पर हमला, सभी 13 नागरिक सुरक्षित

यमन के पास लाल सागर में भारतीय ध्वज वाले कारोबारी जहाज एमएसवी फैजे नूर-ए-औलिया पर हमला हुआ, जिसके बाद जहाज डूब गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया।

ईरान में राजनीतिक हलचल तेज

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी की खबरें सामने आई हैं। कुछ सांसदों का आरोप है कि अमेरिका के साथ बातचीत और संभावित समझौते की प्रक्रिया से देश के हित प्रभावित हुए हैं। वहीं रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा और परमाणु नीति से जुड़े मामलों में राष्ट्रपति की भूमिका भी सीमित किए जाने की चर्चा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर यदि स्थायी और भरोसेमंद समझौता होता है तो वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि केवल समुद्री मार्ग खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और बीमा कंपनियों का विश्वास भी बहाल करना आवश्यक होगा। तभी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो सकेगी और तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा।