बिलासपुर अपोलो अस्पताल का बड़ा फर्जी डॉक्टर कांड: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सहित 27 मरीजों की मौत का कनेक्शन, पुलिस ने कोर्ट में पेश की रिपोर्ट
बिलासपुर, 9 जुलाई 2026: छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर के प्रतिष्ठित अपोलो अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले बहुचर्चित फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट मामले (Fake Cardiologist Case Bilaspur) में पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर अदालत में अंतिम रिपोर्ट पेश कर दी है। पुलिस द्वारा कोर्ट में चार्जशीट और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद यह सनसनीखेज मामला एक बार फिर पूरे प्रदेश में सुर्खियों में है।
कौन है खुद को “इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट” बताने वाला फर्जी डॉक्टर?
पुलिस जांच और कोर्ट में पेश दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य सूत्रधार है:
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असली पहचान: आरोपी का वास्तविक नाम डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव है।
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फर्जी नाम और डिग्रियां: वह नाम बदलकर खुद को “नरेन्द्र जॉन कैम” बताता था। उसने एमबीबीएस (MBBS), एमआरसीपी (MRCP) और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ जैसी बड़ी और फर्जी डिग्रियां तैयार की थीं।
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अस्पताल में नौकरी: इन्हीं जाली दस्तावेजों के दम पर उसने बिलासपुर के नामी अपोलो अस्पताल (Apollo Hospital Bilaspur) में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट की हाई-प्रोफाइल नौकरी हासिल की और सालों तक गंभीर दिल के मरीजों का इलाज करता रहा।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिवंगत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की मौत से कनेक्शन
यह हाई-प्रोफाइल मामला तब खुला जब मध्य प्रदेश के दमोह से इस फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिवंगत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के बेटे प्रो. प्रदीप शुक्ल ने बिलासपुर के सरकंडा थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
क्या हुआ था इलाज के दौरान: अपोलो अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, 1 जून 2006 को इस फर्जी डॉक्टर की नियुक्ति हुई थी। 21 जुलाई 2006 को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल को भर्ती किया गया। 2 अगस्त 2006 को इस फर्जी डॉक्टर ने उनकी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की।
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वेंटिलेटर पर मौत: ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद शुक्ल की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया और इलाज के दौरान 20 अगस्त 2006 को उनका निधन हो गया। परिजनों को इस बात की भनक करीब 19 साल बाद (अप्रैल 2025 में) लगी कि उनके पिता का ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर पूरी तरह फर्जी था।
कार्यकाल के दौरान 27 मरीजों की मौत, लेकिन मिली कानूनी अड़चन
पुलिस की जांच में एक और बेहद डराने वाला खुलासा हुआ है कि इस फर्जी डॉक्टर के कार्यकाल के दौरान इलाज कराने वाले लगभग 27 मरीजों की मौत हुई थी।
हालांकि, पर्याप्त मेडिकल रिकॉर्ड न होने और केवल दो परिवारों द्वारा औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के कारण पुलिस कानूनी रूप से इन सभी मौतों को सीधे तौर पर डॉक्टर की फर्जी विशेषज्ञता से लिंक नहीं कर सकी।
पुलिस ने कोर्ट में पेश की चार्जशीट; अपोलो अस्पताल को मिली क्लीन चिट
सघन जांच के बाद बिलासपुर पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज (कूटरचना) और अवैध रूप से इलाज करने के पुख्ता सबूत जुटाकर 27 जून 2025 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। आरोपी फिलहाल जेल में बंद है।
लेकिन, इस मामले में दूसरा बड़ा मोड़ तब आया जब बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि पुलिस ने अपोलो प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की, पर प्रबंधन या चयन समिति द्वारा जानबूझकर किसी आपराधिक साजिश में शामिल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इसके बाद कानूनी राय लेकर पुलिस ने अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट (क्लीन चिट) दाखिल कर दी।
| मामला स्टेटस | पुलिस एक्शन | वर्तमान स्थिति |
| आरोपी डॉ. नरेन्द्र यादव | पर्याप्त सबूतों के साथ चार्जशीट पेश | जेल में बंद |
| अपोलो अस्पताल प्रबंधन | कोई साजिश का सबूत नहीं मिला | कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट (क्लीन चिट) |
पीड़ित परिवार ने उठाए सवाल, की CBI जांच की मांग
अपोलो अस्पताल प्रबंधन को पुलिस से क्लीन चिट मिलने पर दिवंगत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का परिवार बेहद नाराज है। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि इतने बड़े अस्पताल में बिना वेरिफिकेशन के किसी फर्जी डॉक्टर को रखना बड़ी लापरवाही है, इसलिए वे इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं कि क्या कोर्ट पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करता है या अस्पताल के खिलाफ दोबारा जांच के आदेश देता है।
