फडणवीस ने तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली: शिंदे और अजित के साथ मंत्रालय पहुंचे, पहली कैबिनेट बैठक में मरीजों को ₹5 लाख की मदद देने का निर्णय लिया।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम के 13 दिन बाद राज्य में नई सरकार का गठन हो गया है। देवेंद्र फडणवीस ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, और इस तरह वह भाजपा के पहले नेता बने हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर तीन बार शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद, फडणवीस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास गए और उन्हें धन्यवाद दिया।

फडणवीस के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उपमुख्यमंत्री के पद की शपथ ली। शपथ लेने से पहले उन्होंने बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रधानमंत्री मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। शिंदे महाराष्ट्र के दूसरे नेता हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।

इसके बाद, एनसीपी नेता अजित पवार ने छठी बार उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वह ऐसे पहले नेता बने हैं जिन्होंने महायुति और महाविकास अघाड़ी दोनों गठबंधनों की सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।

शपथ ग्रहण के आधे घंटे बाद, फडणवीस, शिंदे और अजित पवार मंत्रालय पहुंचे। यहां, उनकी पहली कैबिनेट बैठक में फडणवीस ने पुणे के मरीज चंद्रकांत शंकर कुरहाडे को इलाज के लिए मुख्यमंत्री चिकित्सा राहत कोष से 5 लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय लिया।

शपथ समारोह मुंबई के आज़ाद मैदान में शाम 5:31 बजे शुरू हुआ और करीब 30 मिनट तक चला। राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने तीनों नेताओं को मराठी में शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, नितिन गडकरी, नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू सहित NDA शासित 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मौजूद थे।

फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी को साथ लेकर चलने का है। उन्होंने कहा, “हमारे रोल बदल सकते हैं, लेकिन हमारी दिशा वही रहेगी। हम सभी समस्याओं का सामूहिक प्रयास से हल निकालेंगे और महाराष्ट्र को आगे बढ़ाएंगे।” इसके साथ ही, फडणवीस ने लाडली बहन योजना में मिलने वाली 1500 रुपये की राशि को बढ़ाकर 2100 रुपये करने का एलान किया। इसके लिए पहले आर्थिक स्त्रोत मजबूत किए जाएंगे, उसके बाद राशि बढ़ाई जाएगी।

7, 8 और 9 दिसंबर को महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें 9 दिसंबर को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा। मंत्रिमंडल की संरचना लगभग तय हो चुकी है और इसमें ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है। शीतकालीन सत्र से पहले सभी मंत्रियों को शपथ दिलाकर उनके पोर्टफोलियो सौंप दिए जाएंगे।