नारायणपुर: कभी माओवादियों का गढ़ रहे अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों में पहुंचे डॉ. प्रेमा साई महाराज, ITBP के वीर जवानों का किया सम्मान

नारायणपुर: देश के सबसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल अबूझमाड़ में हाल ही में एक बेहद भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। आध्यात्मिक संत एवं प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. प्रेमा साई महाराज ओरछा ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर आगे स्थित एडजूम और आदेर-सिओबी क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने वहां तैनात आईटीबीपी (ITBP) के वीर जवानों का सम्मान कर उनके साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा को नमन किया।

कभी था माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का सुरक्षित ठिकाना

आपको बता दें कि एडजूम और आदेर-सिओबी वही क्षेत्र है, जिसे वर्षों तक माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। सुरक्षा बलों की सफल कार्रवाई के बाद यह इलाका उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब कुख्यात माओवादी नेता बसवा राजू सहित कई बड़े नक्सली यहां मारे गए थे। जिस धरती पर कभी आतंक और हिंसा का साया था, वहीं आज जवानों के सम्मान और राष्ट्रभक्ति का संदेश गूंजता दिखाई दिया।

दुर्गम रास्तों को पार कर पहुंचे सुरक्षा बलों के कैंप

घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और बेहद कठिन मार्गों को पार करते हुए डॉ. प्रेमा साई महाराज सुरक्षा बलों के कैंप तक पहुंचे। उन्होंने जवानों से आत्मीय संवाद किया और देश की सुरक्षा में उनके योगदान की सराहना की।

“सीमाओं से लेकर जंगलों तक राष्ट्र की रक्षा में जुटे जवान भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। कठिनतम परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा के लिए डटे रहना असाधारण साहस का परिचायक है। इन वीर सपूतों के त्याग और समर्पण के कारण ही देश के करोड़ों नागरिक सुरक्षित हैं।” – डॉ. प्रेमा साई महाराज, आध्यात्मिक संत व समाजसेवी

बदलते अबूझमाड़ की नई तस्वीर

एक समय जहां केवल बंदूक और बारूद की आवाजें सुनाई देती थीं, वहां अब विकास, विश्वास और सुरक्षा का वातावरण दिखाई दे रहा है। सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों और उनकी बहादुरी ने इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. प्रेमा साई महाराज का यह दौरा इसी सकारात्मक और बदलते अबूझमाड़ का प्रतीक बनकर सामने आया है।

यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि उन वीर जवानों के प्रति पूरे समाज की कृतज्ञता का सार्वजनिक सम्मान था, जो अपने परिवारों से दूर रहकर राष्ट्र की सुरक्षा में दिन-रात समर्पित हैं।

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