वोटर लिस्ट के मुद्दे पर रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन आज

कलेक्ट्रेट तक निकलेगा मार्च, प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत होंगे शामिल
रायपुर। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस आज 28 सितंबर को रायपुर में कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन और मार्च करेगी। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। भगत 27-28 सितंबर के रायपुर दौरे पर हैं और इस दौरान पार्टी की विभिन्न बैठकों एवं कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को अपने देशव्यापी आंदोलन के दूसरे चरण का हिस्सा बताया है। पार्टी ने 25 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस समितियों को राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने का कार्यक्रम दिया था। इसके बाद 28 सितंबर को जिला कांग्रेस समितियों के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन करने के निर्देश जारी किए गए थे।
मतदाता सूची और SIR को लेकर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलावों के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग के साथ उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी उठाई है।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की ओर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की संभावना है।
25 सितंबर को राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालयों तक हुआ था मार्च
कांग्रेस के घोषित कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन के पहले चरण में 25 सितंबर को देशभर में राज्य निर्वाचन आयोगों के कार्यालयों तक मार्च का आयोजन किया गया था। अब दूसरे चरण में जिला स्तर पर कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन किया जा रहा है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी जिला कांग्रेस समितियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए थे।
सुखदेव भगत की मौजूदगी में जुटेंगे कांग्रेस नेता-कार्यकर्ता
रायपुर में होने वाले प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, जिला एवं ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की तैयारी है। सुखदेव भगत के प्रदेश प्रभारी बनने के बाद उनका यह रायपुर दौरा संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव आयोग में आंतरिक आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस
इस पूरे विवाद के बीच द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), नए मतदाताओं से संबंधित प्रक्रियाओं और चुनावी डेटाबेस से जुड़े विषय शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई इन रिपोर्टों के बीच आयोग की ओर से भी संबंधित मुद्दों पर अपनी स्थिति रखी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, इसी घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग की बैठकों और सार्वजनिक ब्रीफिंग में तीनों आयुक्तों की संयुक्त मौजूदगी भी रही।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पहले भी उठ चुकी है
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग इससे पहले भी विपक्षी दलों की ओर से संसद में उठाई जा चुकी है। अप्रैल 2026 में 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों ने कुमार को पद से हटाने के लिए नया नोटिस दिया था। नोटिस में विभिन्न संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कई आरोप लगाए गए थे।
इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष की ओर से दिए गए पूर्व नोटिसों को स्वीकार नहीं किया था।
पुराने मामलों में भी सामने आए हैं चुनाव आयुक्तों के मतभेद
चुनाव आयोग के भीतर आयुक्तों के बीच मतभेद का इतिहास पुराना है। 1993 में आयोग को बहुसदस्यीय बनाए जाने के बाद तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच अधिकारों एवं कामकाज को लेकर मतभेद सामने आए थे। इस व्यवस्था को टीएन शेषन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने बहुसदस्यीय चुनाव आयोग की व्यवस्था को बरकरार रखा था।
वर्तमान विवाद में भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर राजनीतिक तथा संस्थागत स्तर पर बहस जारी है।

