CIPET रायपुर में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन
बीरगांव।
राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA), छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 06 एवं 07 अगस्त 2026 को केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), रायपुर में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य नगरीय निकायों में प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन, रिसाइक्लिंग एवं वैज्ञानिक निपटान को लेकर अधिकारियों एवं मैदानी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना रहा।
कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न नगर निगमों एवं नगरीय निकायों से नोडल अधिकारी, जिला समन्वयक (PIU) एवं स्वच्छता दीदियों ने सहभागिता की। CIPET के विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को प्लास्टिक रिसाइक्लिंग, अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे का पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं पुनर्चक्रण सहित प्लास्टिक वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन की विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्लास्टिक कचरे के पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों, सिंगल यूज प्लास्टिक को कम करने तथा नगरीय क्षेत्रों में प्रभावी प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था विकसित करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त तकनीकी जानकारी को अपने-अपने नगरीय निकायों में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रेरित किया गया।
अंतिम दिवस मुख्य कार्यपालन अधिकारी, SUDA की भी उपस्थिति रही। वहीं प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रमाण पत्र वितरण एवं समापन समारोह में नगर पालिक निगम बीरगांव के आयुक्त श्री युगल किशोर उर्वशा को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।
आयुक्त श्री युगल किशोर उर्वशा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्लास्टिक कचरे का बेहतर प्रबंधन केवल नगरीय निकायों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की सहभागिता से ही इसे प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को जमीनी स्तर पर लागू करने और स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त शहर की दिशा में निरंतर प्रयास करने की बात कही।
कार्यशाला के सफल आयोजन से नगरीय निकायों के अधिकारियों एवं स्वच्छता कार्यकर्ताओं को प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट की आधुनिक तकनीकों एवं प्रभावी प्रबंधन प्रणाली की व्यावहारिक जानकारी मिली, जो प्रदेश में स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत करने में सहायक होगी।
