रायपुर : खेल में अपनी प्रतिभा को पहचाने और भविष्य संवारें

बस्तर-सरगुजा ओलंपिक सहित राष्ट्रीय खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से निखरी छत्तीसगढ़ के युवा पीढ़ी की पहचान

लेखक: तेजबहादुर सिंह भुवाल (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

रायपुर, 31 जुलाई 2026:

एक समय था जब यह माना जाता था कि केवल पढ़ाई-लिखाई ही उज्ज्वल भविष्य और अच्छी नौकरी का मार्ग है। इसी सोच को दर्शाते हुए कहा जाता था— ‘पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब।’ लेकिन आज का भारत और छत्तीसगढ़ इस पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल चुका है।

यदि किसी युवा में खेल के प्रति जुनून, अनुशासन और समर्पण है, तो वह खेलों के माध्यम से भी अपने सपनों को साकार कर सकता है। शिक्षा और खेल, दोनों मिलकर व्यक्तित्व का समग्र विकास करते हैं तथा जीवन में सफलता के नए द्वार खोलते हैं।


छत्तीसगढ़ में खेलों का नया दौर: बस्तर और सरगुजा ओलंपिक

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा ग्रामीण और जनजातीय अंचलों की छिपी प्रतिभाओं को निखारने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं:

  • बस्तर और सरगुजा ओलंपिक: इन आयोजनों ने सुदूर वनांचलों तक खेल संस्कृति को पहुँचाया है। परंपरागत खेलों के साथ-साथ आधुनिक खेलों में भी हजारों युवाओं, महिलाओं और बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है।

  • राष्ट्रीय खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता से राज्य के आदिवासी और ग्रामीण युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रदेश में खेल अकादमियों का सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार और नए खेल मैदानों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।


खिलाड़ियों को प्रोत्साहन: सर्वोच्च खेल पुरस्कार

छत्तीसगढ़ सरकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य स्तर पर सम्मानित और प्रोत्साहित करती है:

  1. गुंडाधुर सम्मान: यह छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण के तहत दिया जाने वाला सर्वोच्च खेल पुरस्कार है, जो बस्तर के वीर नायक गुंडाधुर की स्मृति में राज्य के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को दिया जाता है।

  2. महाराज प्रवीरचंद भंजदेव पुरस्कार: यह पुरस्कार विशेष रूप से तीरंदाजी (Archery) के खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रदान किया जाता है।


राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर चमकते छत्तीसगढ़ के सितारे

छत्तीसगढ़ के कई खिलाड़ियों ने वैश्विक मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। हाल ही में ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (ग्लासगो) में महिला 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतकर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। इसी तरह अमितेश कुजूर ने भी राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है।


खेलों में करियर के नए आयाम

आज के दौर में खेल केवल मैदान तक सीमित नहीं हैं। खेल प्रशिक्षक (Coach), फिटनेस विशेषज्ञ, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स साइंस, खेल पत्रकारिता (Sports Journalism) और खेल प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए रोजगार और करियर की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

डिजिटल दुनिया के इस दौर में अभिभावकों और शिक्षकों की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को मैदान की ओर प्रेरित करें, क्योंकि खेल का मैदान ही अनुशासन, टीम भावना, धैर्य और नेतृत्व क्षमता जैसी जीवन की सबसे बड़ी सीख देता है।