रायपुर — चर्चित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) पेपर लीक घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चार प्रमुख आरोपियों को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच लंबी चल रही है और सभी आरोपी लंबे समय से जेल में हैं, ऐसे में उन्हें सशर्त रिहाई दी जा सकती है।
🔹 जमानत पाने वाले आरोपी
जिन चार आरोपियों को जमानत मिली है, उनमें शामिल हैं —
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पूर्व चेयरमैन टामन के बेटे और भतीजे,
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कारोबारी श्रवण के बेटे और बहू।
इन सभी पर PSC परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कराने और करोड़ों रुपये की हेराफेरी में संलिप्त होने के गंभीर आरोप हैं।
🔹 सोनवानी ने कराई थी कॉपी — जांच में खुलासा
जांच एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सोनवानी नामक व्यक्ति ने परीक्षा प्रश्नपत्र की कॉपी कराई थी, जिसे आगे आरोपियों तक पहुंचाया गया।
यह पेपर लीक मुख्य परीक्षा से पहले ही कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंच चुका था, जिससे पूरा चयन-प्रक्रिया संदिग्ध हो गई थी।
🔹 हाईप्रोफाइल मामला बना CGPSC घोटाला
इस घोटाले में कई प्रभावशाली परिवारों और शिक्षा माफिया के नाम सामने आए थे। आरोप है कि
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कुछ अभ्यर्थियों ने लाखों रुपये में प्रश्नपत्र खरीदे थे,
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और कुछ अधिकारियों ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों को लीक करने में मदद की थी।
राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की थी, जिसने कई महीनों की जांच के बाद चार्जशीट दायर की थी।
🔹 सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी तक मामले का ट्रायल शुरू नहीं हुआ है, और आरोपी पहले ही लंबे समय से जेल में हैं।
न्यायालय ने सख्त शर्तों के साथ बेल मंजूर की —
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आरोपी जांच में सहयोग करेंगे,
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गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे,
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और देश छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे।
🔹 आगे की कार्यवाही
अब राज्य सरकार की एजेंसियाँ बेल मिलने के बाद भी आरोपियों की गतिविधियों पर नज़र रखेंगी।
वहीं, विपक्ष ने इस पर सवाल उठाया है कि इतने बड़े घोटाले के आरोपी बाहर आने से जांच पर असर पड़ सकता है।
इस केस को लेकर जनता और अभ्यर्थियों में अभी भी गहरी नाराज़गी बनी हुई है।
🔹 निष्कर्ष
CGPSC पेपर लीक मामला छत्तीसगढ़ की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा घोटालों में से एक माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की यह जमानत राहत भले ही आरोपियों के लिए बड़ी खबर हो, लेकिन इससे राज्य की भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर फिर सवाल उठने लगे हैं।