अंबिकापुर की सड़क ने खोली व्यवस्था की पोल
रायपुर, 14 सितंबर।
अंबिकापुर के खरसिया चौक की बदहाल सड़क का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रदेश में सड़कों की स्थिति को लेकर सरकार ने गंभीरता दिखाई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से फोन पर सड़क की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली और तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने इसी के साथ प्रदेश के सभी कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में खराब और निर्माणाधीन सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा जरूरत पड़ने पर स्वयं मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने को कहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बारिश के मौसम में सड़कें पूरी तरह दुरुस्त होने तक इंतजार नहीं किया जा सकता। जिन मार्गों पर गड्ढे या जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है, वहां तत्काल गड्ढों की भराई, सड़क का समतलीकरण और पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। दुर्घटना की आशंका वाले स्थानों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक यातायात व्यवस्था भी करने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश में सामने आई सड़कों की हकीकत
मानसून के दौरान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से सड़कों की बदहाली की तस्वीरें सामने आती रही हैं। कहीं बारिश का पानी सड़क पर जमा है तो कहीं बड़े-बड़े गड्ढों और कीचड़ के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। निर्माणाधीन सड़कों पर अधूरे काम और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
13 सितंबर को कवर्धा में रायपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर बारिश के बाद बिगड़े हालात का जायजा लेने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपना काफिला रुकवाया था। उन्होंने मौके का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को तत्काल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
शहरी क्षेत्रों में अधूरी सड़क परियोजनाएं और लंबे समय से चल रहे निर्माण कार्य यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क या पुल क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क तक प्रभावित होने की आशंका रहती है।
ऐसे में सड़क व्यवस्था का मुद्दा केवल नई सड़क बनाने तक सीमित नहीं है। पुरानी सड़कों का नियमित रखरखाव, बारिश के पानी की निकासी, निर्माणाधीन मार्गों पर सुरक्षा और खराब हिस्सों की समय पर मरम्मत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
पहले भी दिए जा चुके हैं गड्ढामुक्त सड़कों के निर्देश
प्रदेश में सड़कों की स्थिति सुधारने को लेकर सरकार और लोक निर्माण विभाग की ओर से पहले भी कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं। जुलाई 2025 में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने प्रदेश की सड़कों और पुल-पुलियों को दिसंबर तक गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य तय किया था। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के साथ खराब हिस्सों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
अरुण साव विभिन्न जिलों में सड़क निर्माण और विकास कार्यों का मैदानी निरीक्षण भी कर चुके हैं। निर्माण की गुणवत्ता में कमी या काम में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने की बात भी सरकार की ओर से कही जाती रही है।
निर्देशों के बाद भी क्यों नहीं बदल रही तस्वीर?
सरकारी स्तर पर लगातार निगरानी और कार्रवाई के दावों के बावजूद कई सड़क परियोजनाओं की धीमी गति और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। समयसीमा में काम पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों पर कार्रवाई के मामले सामने आए हैं। कुछ मामलों में ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई भी की गई है, लेकिन इसके बावजूद कई जगह सड़क परियोजनाओं की रफ्तार अपेक्षित नहीं है।
बारिश आते ही गड्ढे, जलभराव और अधूरे निर्माण की समस्याएं दोबारा सामने आना इस बात का संकेत है कि सड़क निर्माण के साथ उसके रखरखाव और निगरानी की व्यवस्था को भी मजबूत करने की जरूरत है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन निर्माण कार्यों में खामियां पाई गईं, उन पर कार्रवाई के बाद क्या जमीन पर वास्तविक सुधार हुआ? जिन परियोजनाओं में लगातार देरी हो रही है, उनकी निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की जवाबदेही किस स्तर पर तय की गई?
अब जिलों में सीधे होगी निगरानी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के ताजा निर्देशों के बाद सड़क व्यवस्था की जिम्मेदारी को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। अब किसी भी सड़क की खराब स्थिति सामने आने पर केवल संबंधित विभाग को सूचना देने तक बात सीमित नहीं रहेगी। जिला प्रशासन को संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी के साथ समन्वय कर समस्या का समाधान सुनिश्चित करना होगा।
अंबिकापुर की वायरल तस्वीर ने सरकार का ध्यान सड़क व्यवस्था की जमीनी हकीकत की ओर खींचा है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रदेशभर में सड़क सुधार की कार्रवाई कितनी तेजी से जमीन पर दिखाई देती है। आखिरकार सरकार के निर्देशों की असली कसौटी फाइलों में दर्ज कार्रवाई नहीं, बल्कि लोगों को गड्ढामुक्त, सुरक्षित और सुगम सड़क के रूप में मिलने वाला परिणाम होगा।
