ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू; 4 शहरों का सफर, जुटेगी 3 करोड़ की भीड़, सुरक्षा ऐसी कि परिंदा भी पर न मार सके

6 जुलाई 2026। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में 4 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी हैं। उनके जनाजे और अंतिम संस्कार को लेकर इस समय दुनिया भर में चर्चा है। ईरान और इराक में इसके लिए बेहद खास, अभूतपूर्व और ऐतिहासिक तैयारियां की जा रही हैं।

दो देशों के 4 पवित्र शहरों का सफर: 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक

अली खामेनेई का जनाजा शिया समुदाय के लिए बेहद पवित्र माने जाने वाले कई प्रमुख ऐतिहासिक शहरों से होकर गुजरेगा:

  • अंतिम यात्रा का रूट: यह सफर ईरान की राजधानी तेहरान से शुरू होकर धार्मिक शहर कोम, इसके बाद इराक के नजफ और फिर ऐतिहासिक शहर कर्बला पहुंचेगा।

  • मशहद में अंतिम संस्कार: इन सभी पवित्र स्थानों से होते हुए 9 जुलाई 2026 को उनका जनाजा ईरान के मशहद शहर पहुंचेगा, जहां उन्हें पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ अंतिम रूप से दफन (सुपुर्द-ए-खाक) किया जाएगा।

100 देशों के नेता होंगे शामिल, 3 करोड़ की भीड़ का अनुमान

इस ऐतिहासिक विदाई का गवाह बनने के लिए दुनिया भर के 100 से ज्यादा देशों के राजनेता और प्रतिनिधि ईरान पहुंच रहे हैं। रक्षा और खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि इस पूरी अंतिम यात्रा के दौरान अलग-अलग शहरों को मिलाकर करीब 3 करोड़ लोग सड़कों पर उतर सकते हैं। शिया इतिहास में मातम और इस तरह की अंतिम विदाई का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है, जिसे सीधे तौर पर कर्बला के इतिहास से जोड़कर देखा जा रहा है।

फ्लैशबैक: जब 1989 में खुमैनी के जनाजे में बेकाबू हो गई थी भीड़

इस अंतिम यात्रा को लेकर ईरान सरकार और वहां की सेना इतनी मुस्तैद क्यों है, इसके पीछे इतिहास की एक बेहद डरावनी घटना है।

साल 1989 में जब ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी का निधन हुआ था, तब उनके जनाजे में करोड़ों की भीड़ इस कदर बेकाबू हो गई थी कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। उस दौरान उमड़े जनसैलाब के बीच खुमैनी का ताबूत नीचे गिर गया था और उनके कफन तक के चीथड़े उड़ गए थे।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: अतीत की उसी दर्दनाक और अव्यवस्थित घटना से सबक लेते हुए, इस बार अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के लिए ईरान और इराक दोनों देशों में सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए गए हैं कि कहीं भी चूक की कोई गुंजाइश न रहे।