एम्स रायपुर में लैब टेस्ट के लिए पर्ची की झंझट खत्म: अब पूरा सिस्टम हुआ पेपरलेस, डॉक्टर के लिखते ही सीधे लैब पहुंचेगा डेटा
रायपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में से एक एम्स रायपुर (AIIMS Raipur) ने ओपीडी (OPD) में आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब अस्पताल में लैब टेस्ट कराने के लिए मरीजों को प्रिंटेड पर्ची लेकर भटकने की जरूरत नहीं होगी। अस्पताल प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल करते हुए ‘पेपरलेस सिस्टम’ लागू कर दिया है। अब डॉक्टर जैसे ही सिस्टम में टेस्ट लिखेंगे, उसकी जानकारी सीधे लैब और सैंपल कलेक्शन सेंटर पहुंच जाएगी।
अब कैसे काम करेगा नया पेपरलेस प्रोसेस?
पुरानी व्यवस्था के तहत मरीजों को डॉक्टर से पर्ची लेकर मैन्युअल रूप से लैब पहुंचना पड़ता था, जिससे समय और कागज दोनों की बर्बादी होती थी। नई व्यवस्था के तहत:
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डॉक्टर कंप्यूटर सिस्टम में टेस्ट की रिक्वेस्ट दर्ज करेंगे।
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यह जानकारी तुरंत सीधे लैब के मुख्य सिस्टम में ट्रांसफर हो जाएगी।
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मरीज को अब सीधे डोम-1 फलेबोटोमी जोन (सैंपल कलेक्शन सेंटर) जाना होगा।
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वहाँ केवल रजिस्ट्रेशन कराते ही मरीज का बारकोड बन जाएगा और ब्लड या दूसरे सैंपल्स ले लिए जाएंगे।
मरीजों को क्या-क्या मिलेंगे फायदे?
इस डिजिटल पहल से मरीजों को कई तरह की राहत मिलेगी:
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प्रिंटेड पर्ची साथ लेकर घूमने और उसके खोने का डर पूरी तरह खत्म।
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लंबी लाइनों से मुक्ति मिलेगी और कम समय में सैंपल कलेक्शन हो जाएगा।
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डिजिटल ट्रैकिंग के कारण पूरी प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान, तेज और सुरक्षित होगी।
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कागज का इस्तेमाल बंद होने से पर्यावरण को भी सीधा फायदा पहुंचेगा।
बच्चों के लिए खास ‘चाइल्ड-फ्रेंडली’ रूम
एम्स रायपुर ने मासूम बच्चों का भी खास ख्याल रखा है। डोम-1 सेंटर में बच्चों के लिए एक अलग चाइल्ड-फ्रेंडली सैंपल कलेक्शन रूम तैयार किया गया है। इस खास रूम में ऑडियो-वीडियो (सिनेमा/कार्टून) की सुविधा दी गई है, ताकि सुई लगते समय या ब्लड सैंपल देते समय बच्चे घबराएं नहीं और उनका ध्यान बंटा रहे।
अस्पताल प्रशासन का क्या कहना है?
इस नई सुविधा का आधिकारिक उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक और सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने किया। उन्होंने बताया कि एम्स लगातार आधुनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपना रहा है ताकि आम जनता को बिना किसी परेशानी के आसान हेल्थ सर्विसेज मिल सकें।
वहीं, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. (डॉ.) डी.के. त्रिपाठी ने कहा कि इस पेपरलेस व्यवस्था से रोज आने वाले हजारों मरीजों को तेजी से इलाज की सुविधा मिलेगी और अस्पताल की कार्यप्रणाली भी चुस्त-दुरुस्त होगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
