ब्लैक सी और होर्मुज में गहराया समुद्री संकट: 48 घंटे में भारतीय नाविकों वाले 3 जहाजों पर हमले, 23 क्रू मेंबर्स रेस्क्यू

नई दिल्ली: ब्लैक सी (काला सागर) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों और व्यापारिक मालवाहक जहाजों पर ड्रोन व समुद्री हमले अचानक तेज हो गए हैं। पिछले 48 घंटों के भीतर भारतीय नाविकों की मौजूदगी वाले जहाजों को निशाना बनाने का यह लगातार तीसरा मामला सामने आया है।

ताजा घटनाक्रम में रूस के सोची तट के पास लाइबेरिया के झंडे वाले एक तेल टैंकर पर समुद्री ड्रोन से भीषण हमला किया गया, जिससे टैंकर में आग लग गई।

1. सोची तट के पास ‘एफ्रामैक्स रियो’ पर समुद्री ड्रोन अटैक

  • रूस के सोची तट पर हमला: रूस के सोची शहर के तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर लाइबेरियाई झंडे वाले तेल टैंकर ‘एफ्रामैक्स रियो’ (Aframax Rio) पर यूक्रेनी समुद्री ड्रोन से हमला किया गया। हमले के तुरंत बाद जहाज में भीषण आग लग गई।

  • 23 भारतीय क्रू सुरक्षित: राहत की बात यह रही कि टैंकर पर तैनात सभी 23 क्रू मेंबर्स भारतीय नागरिक थे। राहत एवं बचाव दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया।

  • समुद्र में जलने लगा कच्चा तेल: रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, टैंकर से रिसे कच्चे तेल में आग लगने के कारण सोची शहर के आसपास का आसमान काले धुएं के गुबार से भर गया।

  • ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा होने का दावा: द कीव इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, इस जहाज पर यूक्रेन ने फरवरी में प्रतिबंध लगाए थे। यूक्रेन का दावा है कि यह जहाज रूस के ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा था, जिसका इस्तेमाल पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल निर्यात करने और युद्ध की फंडिंग के लिए किया जा रहा था।

2. पिछले 48 घंटों में भारतीय नाविकों को निशाना बनाने वाले अन्य हमले

  • 6 अक्टूबर (होर्मुज जलडमरूमध्य): पनामा के ध्वज वाले व्यापारिक जहाज ‘MT ऑन पीस’ पर हमला किया गया। इस जहाज पर सवार 17 भारतीय नाविकों में से 11 लोग घायल हो गए।

  • 5 अक्टूबर (ब्लैक सी – रोमानिया तट): तुर्किये के ड्राई कार्गो जहाज ‘रोयाद मम्मदोव’ पर रोमानियाई समुद्री सीमा के पास रूसी ड्रोन से हमला हुआ, जिससे जहाज समुद्र में डूब गया। इस पर 3 भारतीय सवार थे। हादसे में 2 विदेशी नागरिकों की मौत हो गई, जबकि घायल 1 भारतीय नाविक का इलाज रोमानिया के अस्पताल में जारी है।

3. ब्लैक सी बना जंग का नया मैदान: 300 से अधिक जहाजों पर हमले

पिछले दो महीनों में रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष समुद्री मार्गों तक फैल चुका है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के अनाज, तेल और माल ले जाने वाले 300 से अधिक व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है।

हमलों के बढ़ते जोखिम के चलते कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस रूट से व्यापार रोक दिया है, जिसके परिणामस्वरूप शिपिंग फ्रेट चार्ज (माल ढुलाई दरें) में भारी उछाल आया है।

4. वैश्विक खाद्य आपूर्ति और अनाज संकट पर बड़ा असर

  1. गेहूं निर्यात में भारी गिरावट: दुनिया के कुल गेहूं निर्यात में लगभग 30% हिस्सेदारी रखने वाले रूस और यूक्रेन के बीच जारी इस समुद्री युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूट गई है। जोखिम के कारण रूस से गेहूं खरीदने वाले देशों की संख्या 43 से घटकर मात्र 16 रह गई है।

  2. अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़े: आपूर्ति बाधित होने के कारण वैश्विक बाजार में बीते एक साल के भीतर गेहूं की कीमतों में करीब 30% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  3. मक्का (Maize) सप्लाई पर खतरा: यूक्रेन वैश्विक मक्का निर्यात का लगभग 12% हिस्सा नियंत्रित करता है। यदि यह गतिरोध बना रहता है तो दुनिया भर में खाद्य आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी।

  4. वैकल्पिक रास्ते साबित हो रहे नाकाफी: यूक्रेन फिलहाल सड़क, रेल और डेन्यूब नदी के वैकल्पिक मार्गों से अनाज का निर्यात कर रहा है, लेकिन ब्लैक सी के बंदरगाहों की विशाल क्षमता की तुलना में ये रास्ते नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं।