चुनाव आयोग में अंदरूनी कलह: 10 महीनों में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने दर्ज कराया कड़ा विरोध

नई दिल्ली: भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के भीतर एक बड़ा मतभेद सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों के दौरान दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में लिए गए कई फैसलों पर ऑन-रिकॉर्ड 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।

मुख्य बिंदु और आपत्तियां:

  • नए नियम और फॉर्म 6 में बदलाव: नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर आयुक्तों ने सवाल उठाए। सुखबीर सिंह संधू ने इसे “अनधिकृत और अवैध” बताते हुए तुरंत हटाने की मांग की थी।

  • डेटाबेस के केंद्रीकरण पर चिंता: आयुक्तों ने चेतावनी दी कि मतदाता सूची के डेटाबेस और सॉफ्टवेयर (ERONet/ECINet) का नियंत्रण राज्यों के बजाय दिल्ली में केंद्रित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय चुनाव अधिकारियों (EROs) के अधिकार सीमित हो रहे हैं।

  • बिना मंजूरी के फैसले: दोनों आयुक्तों ने दर्ज किया कि आयोग के नाम पर कई फैसले और पत्राचार उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना किए गए, जो कि 2023 के चुनाव आयोग अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 324 के नियमों के खिलाफ है।

  • तकनीकी खामियों का असर: गोवा जैसे राज्यों में सॉफ्टवेयर में विकल्प न होने के कारण कई पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल होने से रह गए।

क्यों अहम है यह मामला?

संविधान के तहत चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों (CEC और दोनों ECs) के पास समान अधिकार होते हैं और नियम के अनुसार आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने चाहिए। दो आयुक्तों द्वारा इस तरह लिखित में बार-बार दर्ज कराई गई आपत्तियां चुनाव आयोग के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना मानी जा रही हैं।


नोट: यह सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचारों के आधार पर तैयार की गई एक निष्पक्ष और तथ्य-आधारित न्यूज़ रिपोर्ट है।