सेवा संकल्प अभियान: 25 करोड़ बच्चों के सपनों से बनेगा 2047 का विकसित भारत

किसी बच्चे की आंखों में देखें तो वहां केवल बचपन नहीं दिखाई देगा, बल्कि आने वाले भारत की तस्वीर दिखाई देगी। किसी की आंखों में अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना है, कोई डॉक्टर बनकर गांव के लोगों की सेवा करना चाहता है, तो कोई वैज्ञानिक और उद्यमी बनकर समाज को नई दिशा देना चाहता है। भारत के करोड़ों बच्चों की आंखों में पल रहे यही अनगिनत सपने मिलकर वर्ष 2047 के ‘विकसित भारत’ की नींव रख रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा और राष्ट्रनिर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ की दूसरी पहल ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसी भविष्य को समझने और उसे आकार देने का संकल्प है। यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस नई पीढ़ी के प्रति अटूट विश्वास का संदेश है, जो 2047 में विकसित भारत की बागडोर संभालेगी।

कक्षाओं से शुरू हो रही विकसित भारत की यात्रा

विकसित भारत की यात्रा स्कूल की कक्षाओं से शुरू होती है। शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित न रखकर बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, कौशल और तकनीकी समझ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। पीएम श्री स्कूल इसी बदलती सोच का बेहतरीन उदाहरण हैं, जहां विद्यार्थियों को modern education के साथ प्रयोग, खेल, कला और तकनीक के माध्यम से सीखने का वातावरण मिल रहा है।

छत्तीसगढ़ में जनजातीय बहुल क्षेत्रों तक पहुंच रही विकास की रोशनी

छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में बच्चों के सपनों को नई उड़ान देना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • एकलव्य आवासीय विद्यालय: दूरस्थ वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, जिससे उनके लिए उच्च शिक्षा के रास्ते खुल रहे हैं।

  • प्रयास आवासीय विद्यालय: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘प्रयास’ विद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को जेईई (JEE), नीट (NEET) और क्लैट (CLAT) जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर दे रहे हैं।

यह बदलाव केवल शिक्षा व्यवस्था का परिवर्तन नहीं, बल्कि उस सोच का विस्तार है जो बच्चों को उनकी परिस्थितियों से नहीं बल्कि उनकी क्षमता और मेहनत से पहचानती है।

2047 का भारत: आत्मनिर्भर और नवाचारी युवा

2047 के भारत की असली पहचान उस बच्चे के आत्मविश्वास से होगी, जो अपने सपनों को पूरा कर सके। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार और उद्यमिता युवाओं को न केवल रोजगार की तलाश करने वाला बल्कि ‘रोजगार पैदा करने वाला’ (Job Creator) बनाएगी।

आज प्रयोगशाला में प्रयोग करता बच्चा, एकलव्य विद्यालय में पढ़ता विद्यार्थी या प्रयास विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता युवा—ये सभी 2047 के भारत की बदलती तस्वीर के गवाह होंगे। 25 करोड़ बच्चों के सपने सिर्फ व्यक्तिगत सपने नहीं हैं, ये 25 करोड़ संभावनाएं और 25 करोड़ नई दिशाएं हैं, जिनसे मिलकर भारत का नया अध्याय लिखा जाएगा।