उच्च शिक्षा विभाग में लंबित कामों पर मंत्री सख्त, तय समयसीमा में कार्रवाई के निर्देश
रायपुर। प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के साथ विभागीय कार्यों में तेजी लाने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को हुई पिछली समीक्षा के दौरान लिए गए निर्णयों की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई। कई कार्यों में अपेक्षित गति नहीं आने पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी खत्म करने और निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में सचिव अविनाश चंपावत, आयुक्त रीता यादव सहित उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर
मंत्री ने शासकीय महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया की भी समीक्षा की। उन्होंने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में आ रही अड़चनों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। इसके अलावा प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया को भी गति देने को कहा गया।
स्नातक प्राचार्य पदों पर पदोन्नति से जुड़े लंबित मामलों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं 15 सितंबर 2026 तक पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक में ऐसे प्राध्यापकों के मामलों की भी समीक्षा की गई, जिन्हें पात्रता नहीं होने के बावजूद पदोन्नति मिली है। अधिकारियों को ऐसे प्रकरणों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
न्यायालयीन मामलों के जल्द निपटारे के निर्देश
सहायक प्राध्यापकों के वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी को मंत्री ने गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर समय पर निर्णय नहीं होने के कारण शिक्षकों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है।
मंत्री ने लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं की विस्तृत जानकारी लेते हुए 1 अक्टूबर 2026 तक सभी मामलों का शत-प्रतिशत निराकरण करने और संबंधित आदेश जारी करने के निर्देश दिए। शिक्षकों की पीएच.डी. अनुमोदन प्रक्रिया की प्रगति तथा मंत्री कार्यालय से प्राप्त शिकायतों पर हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।
बजट की पूरी जानकारी देने के निर्देश
वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी जानकारी अधूरी मिलने पर उन्होंने असंतोष जताया। वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूरी जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया।
शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी के लिए महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षण कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण कराने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य कक्षाओं में शिक्षण की गुणवत्ता और अकादमिक गतिविधियों की निरंतर निगरानी करना है।
सीट वृद्धि के लिए बदलेगा कार्य कैलेंडर
छात्रों के हित में महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने के लिए नया कार्य कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया गया। इसके तहत शासकीय और निजी महाविद्यालयों से सीट बढ़ाने के प्रस्ताव दिसंबर तक प्राप्त किए जाएंगे और जनवरी तक उन पर स्वीकृति जारी करने की व्यवस्था की जाएगी। इससे सीट वृद्धि के आदेश जारी करते समय होने वाली त्रुटियों और बाद की प्रशासनिक परेशानियों को कम किया जा सकेगा।
लॉ और बी.एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से संबंधित 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का भी निर्धारित समयसीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए गए।
चार वर्षीय बी.एड. को लेकर विशेष टीम बनेगी
बैठक में चार वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। एनसीटीई, दिल्ली की नैक ग्रेडिंग संबंधी शर्तों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुरूप प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों की क्षमता के अनुसार आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित करने के लिए तैयारी शुरू करने को कहा गया। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े सभी निर्णयों में विद्यार्थियों के हित, गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी जाए।
