रायपुर में हाईटेक ट्रैफिक सिस्टम पर संकट, 35 सिग्नल और 120 से ज्यादा कैमरे खराब
रायपुर। राजधानी में ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए लगाया गया इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) अब खुद तकनीकी दिक्कतों से जूझ रहा है। शहर में लगे स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, सर्विलांस कैमरे, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और LED सूचना बोर्ड बड़ी संख्या में खराब पड़े हैं। इसके चलते कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था दोबारा पुलिस जवानों के हाथों के इशारे पर निर्भर हो गई है।
पिछले करीब आठ महीनों से सिग्नल और कैमरों के नियमित मेंटेनेंस में बाधा आने के कारण समस्या लगातार बढ़ती गई। बारिश के दौरान स्थिति और खराब हो रही है। कई स्थानों पर सिग्नल की टाइमिंग गड़बड़ा रही है। कहीं लाल बत्ती लंबे समय तक जलती रहती है तो कहीं हरी बत्ती निर्धारित समय पर नहीं बदलती। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस को खराब सिग्नलों को बंद कर मैनुअल तरीके से यातायात संचालित करना पड़ रहा है।
50 स्मार्ट सिग्नल में 35 बंद
शहर में ट्रैफिक नियंत्रण के लिए करीब 50 स्थानों पर स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं। इनमें से लगभग 35 सिग्नल खराब बताए जा रहे हैं। VIP तिराहा विधानसभा रोड, कैनाल चौक पंडरी, कपड़ा मार्केट टर्निंग और फायर ब्रिगेड चौक सहित कई प्रमुख स्थानों पर सिग्नल काम नहीं कर रहे हैं।
तेलीबांधा बाजार चौक समेत अन्य व्यस्त इलाकों में भी यातायात संचालन प्रभावित हो रहा है। पीक ऑवर के दौरान वाहनों का दबाव बढ़ने पर इन स्थानों पर जाम की स्थिति बनने की आशंका बढ़ जाती है। बारिश के दौरान शहर के करीब आधा दर्जन स्थानों पर सिग्नल के बंद होने की समस्या सामने आने की बात कही गई है।
549 कैमरों में 120 से ज्यादा खराब
ट्रैफिक निगरानी के लिए शहर में 142 लोकेशन पर कुल 549 सर्विलांस कैमरे लगाए गए हैं। इनमें से 120 से ज्यादा कैमरे खराब बताए जा रहे हैं। वहीं 14 से अधिक स्थानों पर लगे करीब 56 कैमरों में तकनीकी खराबी की जानकारी सामने आई है।
कैमरों के बंद रहने से प्रमुख सड़कों और चौराहों पर होने वाली गतिविधियों की निगरानी प्रभावित होती है। दुर्घटना, यातायात उल्लंघन और अन्य घटनाओं की निगरानी के लिए लगाए गए इस नेटवर्क की क्षमता भी इससे प्रभावित हो रही है।
16 जगहों का पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम बंद
आपात स्थिति, दुर्घटना, ट्रैफिक जाम या रूट डायवर्जन की जानकारी वाहन चालकों तक पहुंचाने के लिए शहर में 45 स्थानों पर पब्लिक अनाउंसमेंट (PA) सिस्टम लगाए गए हैं। इनमें से 16 स्थानों के सिस्टम खराब हैं।
इसी तरह ट्रैफिक अपडेट और डायवर्जन की जानकारी प्रदर्शित करने के लिए 16 स्थानों पर LED VMS बोर्ड लगाए गए हैं। इनमें से चार स्थानों के बोर्ड काम नहीं कर रहे हैं।
फिर 1991 जैसी मैनुअल व्यवस्था पर निर्भरता
हाईटेक ट्रैफिक सिस्टम के बावजूद मौजूदा स्थिति ने राजधानी की यातायात व्यवस्था को कई स्थानों पर पुराने दौर की ओर धकेल दिया है। 1991 से पहले ट्रैफिक जवान हाथों के इशारे से वाहनों को रोकते और आगे बढ़ाते थे। अब स्मार्ट सिग्नल के बंद होने के कारण कई चौराहों पर पुलिसकर्मी इसी तरीके से यातायात नियंत्रित करते नजर आ रहे हैं।
व्यस्त चौराहों पर जवानों को लगातार मैनुअल ट्रैफिक मैनेजमेंट करना पड़ रहा है। इससे पुलिस बल पर अतिरिक्त दबाव पड़ने के साथ यातायात संचालन की क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
मेंटेनेंस एजेंसी के काम प्रभावित होने से बढ़ी परेशानी
ITMS के संचालन और तकनीकी रखरखाव से जुड़ी एजेंसी के कर्मचारियों के काम प्रभावित होने को भी मौजूदा स्थिति की एक प्रमुख वजह बताया जा रहा है। भुगतान संबंधी समस्या के चलते नियमित मेंटेनेंस नहीं हो पाने से सिग्नल और सर्विलांस सिस्टम की तकनीकी खामियां बढ़ती गईं।
समय पर सर्विसिंग और मरम्मत नहीं होने के कारण अब बड़ी संख्या में उपकरणों को दुरुस्त करने की आवश्यकता सामने आ रही है।
डेढ़ साल पहले तय हुआ था फंड का प्रावधान
ITMS के संचालन के लिए करीब डेढ़ साल पहले राज्य सरकार के स्तर पर एक व्यवस्था तय की गई थी। इसके तहत रायपुर पुलिस द्वारा वर्षभर में की जाने वाली चालानी कार्रवाई से प्राप्त राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा ITMS के संचालन के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था।
इस राशि का उपयोग ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के संचालन, रखरखाव और आवश्यक संसाधनों पर किया जाना था। हालांकि, अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की राशि जारी नहीं होने की बात सामने आई है।
शासन से फंड जारी करने का अनुरोध
DCP ट्रैफिक डॉ. अर्चना झा के अनुसार, सिस्टम के रखरखाव के लिए शासन से फंड जारी करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने बताया कि तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ सिग्नल और कैमरे बंद हैं और इनके मेंटेनेंस के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
फंड उपलब्ध होने के बाद खराब सिग्नल, कैमरों और अन्य ITMS उपकरणों की मरम्मत तथा नियमित रखरखाव का काम शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस जवानों को कई प्रमुख चौराहों पर मैनुअल ट्रैफिक नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
