Raksha Bandhan 2026: मुख्यमंत्री निवास में बहनों ने बांधी राखी, विष्णु देव साय बोले- मातृशक्ति का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत

रायपुर। मुख्यमंत्री निवास में रक्षाबंधन का पर्व इस बार आत्मीयता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी भावनाओं के साथ मनाया गया। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचीं महिलाओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और विश्वास जताया। मुख्यमंत्री ने भी सभी बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद प्रदेश की सेवा के संकल्प को और मजबूत करता है।

रक्षाबंधन के महत्व पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने वाला अवसर है। राखी बांधते हुए बहन भाई के सुख और समृद्धि की कामना करती है, वहीं भाई बहन के सम्मान, सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों से आई बहनों के साथ रक्षाबंधन मनाना उनके लिए विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि माताओं और बहनों का स्नेह उन्हें महिला कल्याण और सशक्तिकरण के लिए और अधिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने की प्रेरणा देता है।

कर्नल अशोक दुबे की पत्नी से राखी बंधवाना रहा भावुक क्षण

रक्षाबंधन समारोह में स्वर्गीय कर्नल अशोक कुमार दुबे की पत्नी सरला दुबे ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कर्नल दुबे के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय कर्नल अशोक कुमार दुबे छत्तीसगढ़ से सेना में शामिल होने वाले पहले जवान थे। उनकी पत्नी से राखी बंधवाना उनके लिए गौरव और भावुकता से भरा क्षण रहा।

कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सविता दीदी और स्मृति दीदी, सावित्री जायसवाल, पद्मश्री डॉ. उषा बारले, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ममता साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन सहित महिला पत्रकारों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, लखपति दीदियों, ड्रोन दीदियों, ई-रिक्शा दीदियों, टीम प्रहरी, विभिन्न समाजों की महिलाओं और दिव्यांग बहनों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी।

सुरक्षा बलों के जवानों के साथ भी जुड़ी ‘स्नेह की डोर’

मुख्यमंत्री ने राजधानी में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन को देश और प्रदेश की सुरक्षा में जुटे जवानों के सम्मान से जोड़ना बेहद भावपूर्ण पहल रही।

उन्होंने बताया कि स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, दिव्यांग बहनों और शहीद जवानों के परिवारों की महिलाओं ने सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी सहित विभिन्न सुरक्षा बलों के करीब 1600 जवानों को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जवान त्योहारों पर भी अपने परिवारों से दूर रहकर देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना समाज की जिम्मेदारी है।

महिला पत्रकारों के योगदान को बताया महत्वपूर्ण

समारोह में मुख्यमंत्री ने महिला पत्रकारों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी वाला क्षेत्र है। महिला पत्रकार कठिन परिस्थितियों में भी साहस और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं और समाज तक देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें पहुंचा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली से लौटने के दौरान रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकार जिज्ञासा ने उन्हें राखी बांधी। उन्होंने इस आत्मीय प्रसंग का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की महिलाएं पारंपरिक भूमिकाओं से आगे निकलकर आर्थिक गतिविधियों और नेतृत्व के नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। लखपति दीदी, ड्रोन दीदी, ई-रिक्शा दीदी, सेटरिंग प्लेट दीदी और मितानिन दीदियां इसके उदाहरण हैं। पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलने से स्थानीय स्तर पर महिला नेतृत्व को और मजबूती मिली है।

महतारी वंदन से महिलाओं की आर्थिक ताकत बढ़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की करीब 68 लाख महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

रक्षाबंधन को देखते हुए योजना की 31वीं किस्त निर्धारित समय से पहले 25 अगस्त को जारी की गई और 631 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में पहुंचाई गई।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना का प्रभाव केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। नियमित राशि मिलने से महिलाओं में आत्मविश्वास और आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी है। कई महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू जरूरतों, बचत और आजीविका से जुड़े कामों में कर रही हैं।

13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लखपति दीदी अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ को 8 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन प्रदेश ने इस लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए पिछले दो वर्षों में 13 लाख 85 हजार महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में सफलता हासिल की है।

उन्होंने इसे प्रदेश की महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और उद्यमशीलता का परिणाम बताया।

ड्रोन दीदी योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं अब आधुनिक तकनीक का उपयोग कर आय के नए अवसर तलाश रही हैं। खेती में ड्रोन के जरिए खाद और दवा का छिड़काव कर महिलाएं आमदनी कर रही हैं। एक एकड़ में छिड़काव से करीब 300 रुपये की आय और 20 से 25 एकड़ में काम करने पर प्रतिदिन 6 से 7 हजार रुपये तक कमाई संभव हो रही है।

ई-रिक्शा और सेटरिंग प्लेट कारोबार से बढ़े अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ लेने वाली श्रेणी में नहीं देखती, बल्कि उन्हें आर्थिक विकास का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में काम कर रही है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में बड़े पैमाने पर आवास निर्माण हो रहा है। प्रतिदिन करीब 1600 आवासों के निर्माण के बीच सेटरिंग प्लेट के कारोबार से जुड़कर स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आय अर्जित कर रही हैं।

नया रायपुर की 92 ई-रिक्शा दीदियों का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए ई-रिक्शा सम्मानजनक और आत्मनिर्भर आजीविका का साधन बन रहा है। जशपुर प्रवास के दौरान बगिया में रक्षाबंधन के अवसर पर 50 महिलाओं को ई-रिक्शा दिए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

नई औद्योगिक नीति में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रदेश की महिलाएं केवल नौकरी या छोटे स्वरोजगार तक सीमित न रहें, बल्कि खुद उद्यम स्थापित करें और दूसरों को रोजगार देने वाली उद्यमी बनें।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं के बैंक खातों में नियमित राशि पहुंचने से उनकी वित्तीय विश्वसनीयता मजबूत हुई है। इससे बैंकिंग व्यवस्था में भी महिलाओं के प्रति ऋण उपलब्ध कराने का भरोसा बढ़ा है।

महिलाओं के नाम जमीन की रजिस्ट्री पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में करीब 30 हजार रजिस्ट्रियां महिलाओं के नाम पर हुई हैं।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति में महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रोत्साहन और रियायतें रखी गई हैं। प्रदेश को अब तक करीब 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होने की जानकारी देते हुए उन्होंने महिलाओं से औद्योगिक नीति के प्रावधानों का लाभ उठाकर उद्यमिता की दिशा में आगे आने की अपील की।

बस्तर में बदल रहा माहौल, शांति के साथ विकास को गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के विकास के रास्ते में बड़ी चुनौती रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ नीति, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां अब शांति और विकास की गतिविधियां बढ़ रही हैं। सरकार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं को उन क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है, जो लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे।

पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आतंकवाद ने कई परिवारों की खुशियां छीनीं और महिलाओं की मांग का सिंदूर उजाड़ा। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि भारत शांति में विश्वास रखता है, लेकिन देश की सुरक्षा और स्वाभिमान के साथ किसी भी चुनौती का दृढ़ता से सामना करना जानता है।

मातृशक्ति के बिना विकसित छत्तीसगढ़ का सपना अधूरा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में छत्तीसगढ़ भी अपनी भूमिका निभा रहा है। प्रदेश की प्राकृतिक, वन और खनिज संपदा के साथ यहां के लोगों की मेहनत और सरलता इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण महिलाओं को सशक्त किए बिना संभव नहीं है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की हर माता-बहन को सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर मिलें।

रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि माताओं और बहनों का विश्वास सरकार के लिए प्रेरणा और शक्ति का स्रोत है। इसी शक्ति के आधार पर सशक्त परिवार, आत्मनिर्भर महिलाएं, समृद्ध समाज और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।