रक्षाबंधन रिश्तों में प्रेम, विश्वास और संस्कारों की डोर मजबूत करने वाला पर्व : पुरंदर मिश्रा

रायपुर। रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और पारस्परिक सम्मान को नई ऊंचाई देता है। यह पर्व केवल राखी बांधने की परंपरा तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार में प्रेम, सामाजिक सद्भाव और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का संदेश देता है। यह विचार रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरंदर मिश्रा ने रक्षाबंधन की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्ता पर व्यक्त किए।

पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भारतीय परंपरा में रक्षा-सूत्र को मंगलकामना, सुरक्षा, प्रेम और संकल्प का प्रतीक माना गया है। रक्षाबंधन हमें यह सीख देता है कि रिश्तों की मजबूती केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, विश्वास, सहयोग और जिम्मेदारी से होती है। भाई-बहन का रिश्ता जीवन के हर उतार-चढ़ाव में एक-दूसरे का साथ देने की प्रेरणा देता है।

श्रीकृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग देता है निस्वार्थ स्नेह का संदेश

रक्षाबंधन से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग विशेष रूप से उल्लेखनीय है। लोकमान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक हिस्सा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। द्रौपदी के इस आत्मीय भाव से प्रभावित होकर श्रीकृष्ण ने सदैव उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया।

पुरंदर मिश्रा ने कहा कि यह प्रसंग निस्वार्थ प्रेम, आत्मीयता और कठिन परिस्थितियों में अपने प्रियजनों के साथ मजबूती से खड़े रहने की भावना को दर्शाता है।

रक्षा-सूत्र से जुड़ी है प्राचीन परंपरा

उन्होंने कहा कि रक्षा-सूत्र की परंपरा को इंद्र और इंद्राणी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में भी स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि देवासुर संग्राम के दौरान इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनकी विजय और सुरक्षा की कामना की थी। इस परंपरा में रक्षा-सूत्र को शुभकामना, संरक्षण और विजय के संकल्प का प्रतीक माना गया है।

राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा में निहित है रिश्तों की गरिमा

रक्षाबंधन से संबंधित एक अन्य प्रसिद्ध कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता लक्ष्मी ने राजा बलि को भाई मानकर रक्षा-सूत्र बांधा था। राजा बलि ने भी बहन के स्नेह और सम्मान को स्वीकार करते हुए उनकी इच्छा का आदर किया।

पुरंदर मिश्रा ने कहा कि यह कथा भाई-बहन के रिश्ते में स्नेह, सम्मान, विश्वास और वचनबद्धता के महत्व को रेखांकित करती है।

रक्षा-सूत्र का व्यापक सांस्कृतिक महत्व

विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि सनातन परंपरा में रक्षा-सूत्र का महत्व केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रहा है। धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ अवसरों पर गुरु, पुरोहित तथा परिवार के वरिष्ठ सदस्य भी मंगलकामना और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में रक्षा-सूत्र बांधते हैं। समय के साथ यह परंपरा भाई-बहन के प्रेम से विशेष रूप से जुड़ती गई और श्रावण पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का पर्व व्यापक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाने लगा।

आधुनिक समय में भी प्रासंगिक है रक्षाबंधन का संदेश

पुरंदर मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में रक्षाबंधन का संदेश और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। आज यह पर्व केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प तक सीमित नहीं है, बल्कि भाई और बहन दोनों के एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनने और परस्पर सम्मान व विश्वास बनाए रखने का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि राखी का धागा भले ही छोटा हो, लेकिन उसमें जुड़ी भावनाएं बेहद गहरी होती हैं। यह धागा केवल कलाई को नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ता है। ऐसे पर्व परिवारों में संस्कार और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा एकता की भावना को मजबूत करते हैं।

27 अगस्त को 2100 माताओं-बहनों की सहभागिता में भगवान जगन्नाथ को अर्पित होगा रक्षा-सूत्र

रक्षाबंधन के अवसर पर 27 अगस्त को सुबह 11 बजे से 2100 माताओं एवं बहनों की उपस्थिति में भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी को रक्षा-सूत्र अर्पित करने का विशेष धार्मिक आयोजन किया जाएगा।

इस अवसर पर माताएं और बहनें श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी को रक्षा-सूत्र अर्पित करेंगी तथा प्रदेश और क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि, सद्भाव एवं जनकल्याण की प्रार्थना करेंगी।

पुरंदर मिश्रा ने कहा कि यह आयोजन सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और मातृशक्ति के सम्मान का सुंदर समागम होगा। 2100 माताओं-बहनों की सामूहिक सहभागिता इसे आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष बनाएगी।

प्रदेशवासियों को दी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं

विधायक पुरंदर मिश्रा ने प्रदेशवासियों और रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के सभी नागरिकों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी से सभी परिवारों के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए कहा कि भाई-बहन के रिश्तों में प्रेम और विश्वास सदैव कायम रहे तथा समाज में आपसी सद्भाव और भाईचारे की भावना और मजबूत हो।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन की राखी केवल कलाई पर बंधने वाला धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी का ऐसा पवित्र सूत्र है, जो रिश्तों को मजबूती देता है और समाज को एकता एवं सद्भाव का संदेश देता है।