माओवाद के साए से विकास की राह तक: कड़ेनार में पहुंचा प्रशासन, एक ही शिविर में मिलीं दर्जनों सरकारी सेवाएं
कोण्डागांव। कभी माओवाद के प्रभाव के कारण जहां प्रशासनिक पहुंच और सरकारी सेवाओं की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती थी, आज उसी दूरस्थ क्षेत्र में विकास की गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। कोण्डागांव जिले के सुदूर ग्राम कड़ेनार में आयोजित दो दिवसीय बहुविभागीय शिविर ने ग्रामीणों को उनके गांव के नजदीक ही विभिन्न शासकीय योजनाओं और सेवाओं से जोड़ने का काम किया।
कड़ेनार के साथ ही आश्रित ग्राम मदोड़ा, बेचा और कीलम के ग्रामीण भी शिविर में पहुंचे। जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को छोटी-छोटी शासकीय जरूरतों के लिए जिला या विकासखंड मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करने से राहत देना था। अलग-अलग विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एक ही स्थान पर मौजूद रहे, जिससे ग्रामीणों को कई योजनाओं का लाभ लेने और आवश्यक दस्तावेजों के लिए आवेदन करने की सुविधा मिली।
गांव में ही बने आधार और जॉब कार्ड
शिविर में आधार संबंधी सेवाओं का लाभ लेते हुए 18 लोगों के नए आधार कार्ड बनाए गए, जबकि 24 लोगों का बायोमेट्रिक अपडेट किया गया। पंचायत विभाग ने 72 नए जॉब कार्ड जारी किए और 41 जॉब कार्ड का ई-केवाईसी कराया।
श्रम विभाग के काउंटर पर 62 श्रमिकों का पंजीयन किया गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से 33 हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए, जिससे पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा।
राशन कार्ड से लेकर जाति-निवास प्रमाण पत्र तक मिली सुविधा
ग्रामीणों को राजस्व एवं खाद्य विभाग की सेवाओं के लिए भी मुख्यालय जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। राजस्व विभाग को जाति प्रमाण पत्र के 72 और निवास प्रमाण पत्र के 35 आवेदन प्राप्त हुए।
खाद्य विभाग के माध्यम से राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए 144 आवेदन लिए गए, जबकि 5 नए राशन कार्ड के लिए आवेदन प्राप्त हुए।
डाक विभाग ने शिविर में 12 बैंक खाते खोले, वहीं नए खाते खुलवाने के लिए 32 लोगों से आवेदन प्राप्त किए गए।
महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ने की पहल
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए बिहान योजना के तहत भी काम किया गया। शिविर में 11 व्यक्तिगत खाते और एक सामूहिक खाता खोला गया तथा 5 नए स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए समूह आधारित आजीविका गतिविधियों के नए अवसर तैयार होने की उम्मीद है।
दिव्यांगजनों को मिले उपयोगी सहायक उपकरण
शिविर में समाज कल्याण विभाग ने दिव्यांगजनों की जरूरतों को भी प्राथमिकता दी। 8 दिव्यांग हितग्राहियों को सहायक उपकरण प्रदान किए गए। इनमें 2 व्हीलचेयर, 2 बैसाखी और 4 छड़ियां शामिल थीं।
उपकरण मिलने के बाद हितग्राहियों ने खुशी जाहिर की। उनका कहना था कि इन साधनों से रोजमर्रा के कामों में आने वाली कठिनाइयां कम होंगी और वे अधिक सहजता से अपनी दैनिक गतिविधियां कर सकेंगे।
गांव में बना आयुष्मान कार्ड, शारदा कोर्राम को मिली राहत
शिविर से लाभान्वित ग्रामीण शारदा कोर्राम के लिए यह पहल खास तौर पर राहत लेकर आई। उन्होंने बताया कि उनका आयुष्मान कार्ड अब तक नहीं बन पाया था। गांव में ही शिविर लगने से उन्होंने आसानी से आवेदन प्रक्रिया पूरी की और उनका आयुष्मान कार्ड बन गया।
अब पात्रता के अनुसार उन्हें आयुष्मान योजना के तहत निर्धारित सीमा तक उपचार की सुविधा मिल सकेगी। शारदा सहित अन्य ग्रामीणों ने गांव तक सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रशासन का आभार जताया।
दूरस्थ गांवों तक पहुंच रहा शासन
कड़ेनार में आयोजित यह शिविर केवल सरकारी योजनाओं के वितरण का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक पहुंच के विस्तार और ग्रामीणों को शासन की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल के रूप में भी सामने आया। एक ही स्थान पर कई विभागों की सेवाएं मिलने से ग्रामीणों का समय, श्रम और आवागमन का खर्च बचा।
जिला प्रशासन का प्रयास है कि दूरस्थ एवं पहले कठिन पहुंच वाले इलाकों में भी ग्रामीणों को आवश्यक दस्तावेज, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, खाद्य और बैंकिंग जैसी मूलभूत सेवाएं उनके घर के करीब उपलब्ध कराई जाएं।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश भोई के निर्देशन में आयोजित शिविर में जनपद पंचायत कोण्डागांव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री उत्तम महोबिया, तहसीलदार श्री विजय प्रताप सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कड़ेनार में हुई यह पहल इस बदलाव की तस्वीर पेश करती है कि जहां कभी पहुंच बनाना चुनौती थी, वहां अब सुरक्षा के साथ शासन की योजनाएं और विकास की सुविधाएं भी पहुंच रही हैं।
