‘स्रोत महोत्सव 2026’: सीएम विष्णु देव साय ने की शुरुआत; ISRO और नेशनल वाटर एकेडमी के साथ हुए 2 बड़े MoU, नदी संरक्षण के लिए बने 5 स्तंभ

रायपुर: “नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा।” इसी संकल्प के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों (Sources) और जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) की पहचान, वैज्ञानिक संरक्षण, और जल पुनर्भरण को एक जन-आंदोलन का रूप देना है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने जल संरक्षण पर केंद्रित पुस्तक ‘नीर-नारी-निधि’ का विमोचन भी किया।

5 प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा नदी संरक्षण अभियान

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि छत्तीसगढ़ में नदियों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए 5 प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा:

  1. मानचित्रण (Mapping): नदियों के उद्गम, प्रवाह और भू-उपयोग का वैज्ञानिक अध्ययन व मैपिंग।

  2. संरक्षण (Conservation): मृदा क्षरण रोकना, वनस्पति संरक्षण और प्राकृतिक जल संरचनाओं को बचाना।

  3. पुनर्भरण (Recharge): वर्षा जल को तेजी से जमीन के भीतर पहुंचाकर भू-जल स्तर बढ़ाना।

  4. जनभागीदारी (Community Engagement): नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थानीय समितियां गठित कर जन-आंदोलन बनाना।

  5. समयबद्ध कार्ययोजना (Action Plan): वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से चरणबद्ध क्रियान्वयन।

आधुनिक तकनीक और जल प्रबंधन के लिए 2 ऐतिहासिक MoU

राज्य में जल प्रबंधन और वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत करने के लिए दो बड़े राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए:

  1. एंट्रिक्स कॉरपोरेशन (Antrix Corporation), बेंगलुरु: इसरो (ISRO) की इस व्यावसायिक शाखा के साथ हुए समझौते के तहत आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial Technology) का उपयोग किया जाएगा। शुरुआती चरण में कुनकुरी तहसील के 1540 वर्ग किमी क्षेत्र में जल संसाधनों की सैटेलाइट से निगरानी और विश्लेषण होगा।

  2. नेशनल वाटर एकेडमी (NWA), पुणे: इस एमओयू से राज्य के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले को आधुनिक जल प्रबंधन और नवीन तकनीकों का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिलेगा।

एक्सपर्ट्स की राय: साइंस और साइट-स्पेसिफिक समाधान

  • प्रो. विनोद तारे (संस्थापक, सीगंगा – IIT कानपुर): उन्होंने जोर दिया कि वर्षा जल ही नदियों का आधार है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का तालमेल ही जल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

  • राजेश सुकुमार टोप्पो (सचिव, जल संसाधन विभाग): उन्होंने बताया कि कार्यशाला में प्रदेश के 9 प्रमुख नदी समूहों पर अलग-अलग चर्चा की जा रही है, ताकि क्षेत्र-विशेष की समस्याओं के अनुसार ‘साइट-स्पेसिफिक’ (Site-Specific) समाधान तैयार किए जा सकें।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश: “छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ बनाने में हमारी जीवनदायिनी नदियों का सबसे बड़ा योगदान है। नदियों को सुरक्षित रखना हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति साझा दायित्व है।”