कर्नाटक बंद (कावेरी जल विवाद): कावेरी पानी के मुद्दे पर फिर गरमाई राजनीति, विरोध-प्रदर्शन से थमी रफ्तार

बेंगलुरु (UPI24 News)। कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर गहरा गया है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के फैसलों और तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने के विरोध में विभिन्न किसान संगठनों, कन्नड़ समर्थक समूहों और स्थानीय यूनियनों ने कर्नाटक बंद (Karnataka Bandh) का आह्वान किया।

बंद का व्यापक असर: क्या खुला, क्या बंद?

प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु को न दिए जाने की मांग की है। बंद के दौरान राज्य के कई हिस्सों में मिला-जुला असर देखने को मिला:

  • परिवहन पर प्रभाव: कई जिलों में निजी बसें, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी सेवाएं प्रभावित रहीं। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं को बंद से छूट दी गई।

  • व्यापारिक प्रतिष्ठान: प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक परिसरों में दुकानें बंद रहीं, जबकि सुरक्षा के लिहाज से सार्वजनिक स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

  • बेंगलुरु में विरोध: राजधानी बेंगलुरु, मांड्या और Mysuru में कन्नड़ संगठनों ने सड़कों पर उतरकर राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

क्यों बढ़ा विवाद?

कर्नाटक के किसान संगठनों का कहना है कि कम बारिश (मानसून की कमी) के कारण राज्य के जलाशयों में पानी का स्तर पहले से ही बहुत कम है। ऐसे में राज्य के किसानों की सिंचाई और पीने के पानी की जरूरतों को नजरअंदाज कर तमिलनाडु को पानी देना अनुचित है। वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि वह कानूनी स्थिति और अदालत के आदेशों के तहत बाध्य है, हालांकि वे राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं।