देश के स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल हुआ छत्तीसगढ़ का इतिहास: माधवराव सप्रे और ‘गंगाराम मगरमच्छ’ की गाथाएं पढ़ेंगे छात्र

रायपुर: छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को अब देशव्यापी पहचान मिलने जा रही है। राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा तैयार किए गए देश के नए स्कूली पाठ्यक्रमों में छत्तीसगढ़ की महान हस्तियों और अनोखी लोक-संस्कृति से जुड़ी गाथाओं को शामिल किया गया है। अब देशभर के स्कूली छात्र छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकारों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और यहां की अनूठी लोक कथाओं के बारे में पढ़ेंगे।

पाठ्यक्रम में शामिल प्रमुख नाम और कहानियां

  1. पंडित मुकुटधर पांडेय: हिंदी साहित्य में छायावाद के प्रवर्तक माने जाने वाले महान कवि और साहित्यकार पंडित मुकुटधर पांडेय के योगदान और उनकी कृतियों को राष्ट्रीय स्तर की पाठ्यपुस्तकों में स्थान दिया गया है।

  2. पंडित माधवराव सप्रे: छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और हिंदी के महान लेखक पंडित माधवराव सप्रे की जीवनी व उनके ऐतिहासिक योगदान से देश की भावी पीढ़ी रूबरू होगी।

  3. ‘गंगाराम मगरमच्छ’ की अनोखी कहानी: बेमेतरा जिले के बावतरा गांव के तालाब में रहने वाले प्रसिद्ध इंसानों के दोस्त ‘गंगाराम मगरमच्छ’ की कहानी को भी पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है। गंगाराम मगरमच्छ अपनी अहिंसक प्रवृत्ति और ग्रामीणों के साथ आत्मीय संबंध के लिए जाना जाता था, जो मनुष्य और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व का एक अद्भुत उदाहरण है।

राज्य के लिए ऐतिहासिक गौरव का क्षण

छत्तीसगढ़ के इतिहास और लोक-जीवन को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने पर शिक्षाविदों, साहित्यकारों और इतिहासकारों ने खुशी जताई है। इस पहल से न केवल देश भर के छात्रों को छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय मंच पर एक नया मुकाम भी हासिल होगा।