बिना परमाणु समझौते भी ईरान से युद्ध रोक सकते हैं डोनाल्ड ट्रम्प! जानें अमेरिका की नई शर्त और ईरान की माँगे

वॉशिंगटन/तेहरान: एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ बिना किसी औपचारिक परमाणु समझौते (Nuclear Deal) के भी सैन्य संघर्ष समाप्त करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। युद्ध के लंबा खींचने और आर्थिक दबावों के कारण अमेरिका की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

1. अमेरिका की मुख्य शर्त: होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना

  • रणनीति में बदलाव: पहले ट्रम्प प्रशासन का मुख्य लक्ष्य ईरान को एक सख्त परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कराने के लिए मजबूर करना था। हालांकि, युद्ध लंबा खींचने की वजह से अमेरिका ने अपना फोकस बदला है।

  • नई शर्त: यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोल देता है और वाणिज्यिक/व्यापारिक जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल कर देता है, तो अमेरिका युद्ध रोकने के लिए तैयार हो सकता है।

  • इंटेलिजेंस पर भरोसा: ट्रम्प का मानना है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ईरान की परमाणु गतिविधियों पर कड़ी नजर रख सकती हैं। यदि ईरान भविष्य में दोबारा परमाणु हथियार बनाने का प्रयास करता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

2. ईरान की प्रमुख माँगे

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघदार के अनुसार, ईरान केवल होर्मुज खोलने पर राजी नहीं होगा। उसने युद्ध रोकने के बदले निम्नलिखित शर्तें रखी हैं:

  • युद्ध की स्थायी समाप्ति और नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत हटाना।

  • पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी

  • ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना और विदेशों में फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करना।

  • युद्ध में हुए भारी नुकसान के लिए आर्थिक मुआवजा

  • क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह, हूती आदि) के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों पर रोक।

3. ट्रम्प पर घरेलू व आर्थिक दबाव

  • पेट्रोल की बढ़ती कीमतें: ईरान के साथ युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अमेरिका में ईंधन/पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

  • आगामी चुनाव: अमेरिका में मध्यावधि (Midterm) चुनाव नजदीक होने के कारण घरेलू स्तर पर युद्ध समाप्त करने का राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

4. अमेरिका के लिए ईरान क्यों बना है बड़ी चुनौती?

  • 3,000+ बैलिस्टिक मिसाइलें: ईरान के पास 2,000 किमी तक की मारक क्षमता वाली मिसाइलों का विशाल बेड़ा है, जिनमें से कई पहाड़ों के नीचे बनी अंडरग्राउंड ‘मिसाइल सिटी’ में सुरक्षित हैं।

  • ऊर्जा मार्ग पर नियंत्रण: दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% और एलएनजी (LNG) का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, जिसका उत्तरी तट पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में है।

  • ड्रोन और सहयोगी नेटवर्क: ईरान के पास शाहेद (Shahed) जैसे लंबी दूरी के घातक ड्रोन का बड़ा बेड़ा है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में हिजबुल्लाह, हूती और इराकी शिया गुटों का एक मजबूत नेटवर्क (Forward Defense Strategy) सक्रिय है, जो अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है।