‘RSS की मूल विचारधारा नहीं बदली, लेकिन मोहन भागवत के बयानों में दिख रहा सकारात्मक बदलाव’: मुंबई में बोले शशि थरूर
मुंबई:
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा और संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों पर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त की है। मुंबई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर युवाओं (Gen-Z) से संवाद करते हुए थरूर ने वैचारिक मतभेदों, पार्टी लाइन और युवाओं की राजनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर बात की।
RSS की विचारधारा और मोहन भागवत के बयानों में बदलाव
शशि थरूर ने कहा कि RSS की मूल विचारधारा भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की रही है और संगठन के इस प्राथमिक उद्देश्य में आज भी कोई बदलाव नहीं आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे बीते 10 वर्षों से संघ प्रमुख मोहन भागवत के वक्तव्यों का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं।
थरूर के अनुसार, मोहन भागवत के बयानों में अब वैचारिक बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। IIMUN कार्यक्रम के दौरान भागवत द्वारा Gen-Z युवाओं के साथ संवाद में दी गई बातों को थरूर ने एक सकारात्मक संकेत करार दिया।
वैचारिक विरोधियों से संवाद और राजनीतिक व्यवस्था पर मत
आलोचकों पर निशाना साधते हुए थरूर ने स्पष्ट किया कि केवल मोहन भागवत की उपस्थिति वाले मंच पर जाने के कारण उनके कांग्रेस छोड़ने या उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की मांग करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि विपरीत या भिन्न विचारधारा रखने वाले लोगों से भी निरंतर संवाद बनाए रखना लोकतंत्र में अत्यंत आवश्यक है।
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2029 चुनावों में Gen-Z की भूमिका: थरूर ने कहा कि वर्ष 2029 के आम चुनावों में Gen-Z सबसे बड़ा मतदाता समूह (Voting Group) होगा। दक्षिण एशिया के राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि पारंपरिक और पुराने ढर्रे की राजनीति अब प्रासंगिक नहीं रह गई है और उन्हें युवाओं की सोच के अनुरूप बदलना होगा।
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कांग्रेस पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र: पार्टी लाइन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे उस राजनीतिक दल का हिस्सा हैं जो उनकी सोच के सबसे निकट है और कांग्रेस देश की सबसे कम अलोकतांत्रिक पार्टी है।
‘छात्रों की गूंज’ अभियान और जंतर-मंतर आंदोलन पर आत्ममंथन
कार्यक्रम के दौरान थरूर ने राहुल गांधी द्वारा युवाओं से जुड़े मुद्दों (जैसे NEET पेपर लीक) पर चलाए गए अभियानों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कोटा से ‘छात्रों की गूंज’ अभियान चलाकर युवाओं की समस्याओं को प्रखरता से उठाया था।
हालांकि, थरूर ने स्वीकार किया कि इस अभियान को जनता का वह व्यापक समर्थन प्राप्त नहीं हो सका, जो बाद में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर चले 36 दिवसीय आंदोलन को मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को इस बात पर गंभीर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है कि वह आम जनता और युवाओं की नब्ज सही तरीके से क्यों नहीं पकड़ सकी।
Gen-Z पर संघ प्रमुख मोहन भागवत का दृष्टिकोण
इससे पूर्व, कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आज की नई पीढ़ी (Gen-Z और Gen-अल्फा) को लेकर संघ का दृष्टिकोण साझा किया था। भागवत ने कहा था कि आज का युवा न तो गैर-जिम्मेदार है और न ही देशद्रोही; बल्कि वे पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक देशभक्त और ईमानदार हैं।
भागवत ने माना कि आज के युवा हर मुद्दे पर तर्कसंगत उत्तर और स्पष्टता चाहते हैं। सही समय पर युवाओं के साथ संवाद न हो पाने की कमी को ही उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए बड़े जनांदोलन की मुख्य वजह बताया।
