लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उठे निर्माण गुणवत्ता के सवाल, 18 दिन में 84 स्थानों पर सड़क धंसी
August 6, 2026 upi24 news
लखनऊ। उत्तर प्रदेश का बहुचर्चित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद गंभीर विवादों में घिर गया है। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर मात्र 18 दिनों के भीतर 84 स्थानों पर सड़क धंसने और दरारें आने की घटनाएं सामने आई हैं। इस घटनाक्रम ने निर्माण गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और परियोजना क्रियान्वयन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मामले को गंभीर मानते हुए ठेकेदार कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही सड़क की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच भी कराई जा रही है।
उद्घाटन के कुछ ही दिन बाद बिगड़ी सड़क की हालत
एक्सप्रेसवे का उद्घाटन बड़े दावों के साथ किया गया था। इसे उत्तर प्रदेश की आधुनिक सड़क परियोजनाओं में शामिल किया गया था और दावा किया गया था कि इससे लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम होगी।
लेकिन पहली ही बारिश के बाद कई हिस्सों में सड़क धंसने लगी। जगह-जगह दरारें दिखाई दीं और कई स्थानों पर मरम्मत के लिए पैचवर्क करना पड़ा। कुछ स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत हटाकर दोबारा निर्माण करना पड़ा।
84 स्थानों पर करनी पड़ी मरम्मत
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार—
- एक्सप्रेसवे के दोनों कैरिजवे पर कुल 84 स्थानों पर मरम्मत की गई।
- कई जगह सड़क दोबारा धंस गई।
- कुछ हिस्सों में 100 से 200 मीटर तक पुनर्निर्माण करना पड़ा।
- सड़क के किनारे बने शोल्डर और जल निकासी तंत्र भी प्रभावित मिले।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने सड़क पर असामान्य उछाल, कंपन और दरारों की शिकायत की।
तेज रफ्तार में सफर बना चुनौती
एक्सप्रेसवे पर अधिकतम गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है, लेकिन कई वाहन चालकों ने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्सों से गुजरते समय वाहन असंतुलित महसूस होते हैं।
कुछ स्थानों पर सड़क की सतह नीचे बैठ जाने से भारी वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।
विशेषज्ञों ने जताई निर्माण गुणवत्ता पर चिंता
सिविल इंजीनियरों का मानना है कि समस्या केवल सड़क की ऊपरी परत में नहीं, बल्कि फाउंडेशन और मिट्टी के संपीड़न (Compaction) में भी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- सब-ग्रेड की गुणवत्ता की जांच आवश्यक है।
- जल निकासी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने से वर्षा का पानी संरचना को प्रभावित कर सकता है।
- यदि आधार परत कमजोर है तो केवल पैचवर्क स्थायी समाधान नहीं होगा।
NHAI का बड़ा एक्शन
मामले के सामने आने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए—
- ठेकेदार कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
- संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
- IIT के विशेषज्ञों को तकनीकी जांच सौंपी गई।
- मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली अस्थायी रूप से रोक दी गई।
ठेकेदार कंपनी पर भी सवाल
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण PNC Infratech ने किया था। सड़क में लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों के बाद कंपनी की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है।
NHAI ने कंपनी को नॉन-परफॉर्मिंग कॉन्ट्रैक्टर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की है और भविष्य की निविदाओं में भागीदारी पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी है।
महंगी परियोजना पर बढ़े सवाल
लगभग ₹4,700 करोड़ की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में गिना जाता है। परियोजना का उद्देश्य लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय कम करना तथा औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को गति देना था।
हालांकि उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सामने आई निर्माण संबंधी समस्याओं ने परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
अब आगे क्या?
IIT की तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि सड़क धंसने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। यदि निर्माण में गंभीर तकनीकी खामियां पाई जाती हैं, तो जिम्मेदार एजेंसियों और अधिकारियों पर और सख्त कार्रवाई हो सकती है।
