संत रविदास ने समरसता, समानता और भक्ति का जो मार्ग दिखाया, वही विकसित और सशक्त भारत की आधारशिला : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर, 4 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज का जीवन समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का अमर संदेश है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। संत रविदास ने समाज को ऊंच-नीच, भेदभाव और छुआछूत से ऊपर उठकर मानवता, समान अधिकार और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। यही मार्ग विकसित, समरस और सशक्त भारत की आधारशिला है।

मुख्यमंत्री श्री साय मंगलवार को राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कलश वंदन महाअभियान में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र मिट्टी एवं जल से भरे कलश का श्रद्धापूर्वक वंदन कर पूजन-अर्चन किया। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री ने की कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने संत रविदास के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में संत रविदास जयंती (माघी पूर्णिमा) के अवसर पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन प्रदेशभर में मांस एवं मदिरा की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से एक नया राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण भी संत गुरु रविदास के नाम पर किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश—

“ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न।
छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।।”

—को छत्तीसगढ़ विधानसभा में अंकित कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर प्रयास किया जाएगा।

संतों ने समाज को हर दौर में नई दिशा दी

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत संतों, ऋषियों और महापुरुषों की भूमि है। जब-जब समाज में अन्याय, भेदभाव और छुआछूत जैसी विकृतियां बढ़ीं, तब-तब संतों और महापुरुषों ने समाज को नई दिशा दी। संत रविदास ने अपने जीवन और उपदेशों से सामाजिक समरसता, समानता और सच्ची भक्ति का संदेश देकर समाज में नई चेतना का संचार किया।

उन्होंने कहा कि संत रविदास ने तत्कालीन शासक सिकंदर लोदी के धर्मांतरण के दबाव का भी साहसपूर्वक विरोध किया और यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य समान हैं तथा ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल सच्ची भक्ति और सदाचार है। उनका प्रसिद्ध संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज भी समाज को आंतरिक शुद्धता और आध्यात्मिकता की प्रेरणा देता है।

‘विकास भी, विरासत भी’ हमारा मार्गदर्शक मंत्र

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री का “विकास भी, विरासत भी” का संदेश भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण का मार्गदर्शक सिद्धांत है।

उन्होंने कहा कि संत रविदास की जन्मभूमि से लाई गई पवित्र मिट्टी और जल से भरे कलश देशभर के मठों, मंदिरों और आस्था केंद्रों तक पहुंचाए जा रहे हैं। यह अभियान सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

गांव-गांव पहुंचेगा कलश वंदन महाअभियान

मुख्यमंत्री ने डॉ. सनम जांगड़े के नेतृत्व में सीर गोवर्धनपुर से पवित्र कलश लेकर आए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सराहना की। उन्होंने विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपे तथा गांव-गांव तक अभियान पहुंचाने के लिए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान संत रविदास के समरसता, समानता और सामाजिक एकता के संदेश को प्रदेश के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक पहुंचाएगा।

संत रविदास का जीवन सामाजिक एकता की प्रेरणा

कैबिनेट मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि संत रविदास ने समाज में छोटे-बड़े के भेद को समाप्त कर समानता और सामाजिक एकता का संदेश दिया। वहीं श्री अजय जामवाल ने कहा कि संत रविदास की शिक्षाएं आज पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक हैं और समाज को विभाजित करने वाली शक्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है।

पूर्व सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संत रविदास का समानता, श्रम और सामाजिक समरसता का संदेश आज भी समाज को नई दिशा प्रदान कर रहा है।

कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक श्री अनुज शर्मा, श्री मोतीलाल साहू, श्री इंद्र कुमार साहू, श्री संपत अग्रवाल, श्री रोहित साहू, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, महंत खेलुराम पैगवार, संत श्री युधिष्ठिर लाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, संत समाज एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।