स्टिंग ऑपरेशन में हलाला सिंडिकेट का भंडाफोड़: मौलाना बोला- ‘प्रेग्नेंट हुई तो मैं जिम्मेदार नहीं’, संविधान को चुनौती देकर महिलाओं का शोषण

एक महिला रिपोर्टर द्वारा किए गए सनसनीखेज स्टिंग ऑपरेशन में लखनऊ और गोरखपुर के कुछ धार्मिक मौलानाओं के दोहरे रवैये और गैर-कानूनी दावों का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। फर्जी पहचान के जरिए की गई इस बातचीत में तीन तलाक और हलाला की आड़ में चल रहे संगठित शोषण का काला सच सामने आया है।

1. स्टिंग के दौरान मौलाना के आपत्तिजनक दावे

  • “प्रेग्नेंट हो गई तो मैं गुनहगार नहीं”: जब रिपोर्टर ने हलाला की शर्त और शारीरिक संबंध के नतीजों पर सवाल उठाया, तो मौलाना ने बेझिझक कहा कि यदि इस प्रक्रिया के दौरान महिला गर्भवती हो जाती है, तो इसके लिए वह या उनकी व्यवस्था जिम्मेदार नहीं होगी।

  • सजा का दोहरा पैमाना: मौलाना ने कुतर्क देते हुए दावा किया कि “हलाला मर्द (पुरुष) के लिए सजा है, औरत के लिए नहीं।”

2. कानून और संविधान को खुली चुनौती

  • पुलिस और कोर्ट का बहिष्कार करने का दबाव: मौलाना ने पीड़ित महिला का ब्रेनवॉश करते हुए कहा कि यदि वह इस मामले में पुलिस, अदालत या भारतीय कानून का सहारा लेगी, तो उसे “मुसलमान के नाम पर कलंक” माना जाएगा।

  • समानांतर शरीयत व्यवस्था का खेल: देश में 2019 से तीन तलाक कानूनन अपराध होने के बावजूद, पर्दे के पीछे महिलाओं को कानूनी मदद लेने से रोका जा रहा है और हलाला व निकाह की आड़ में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

क्यों है यह गंभीर मुद्दा?

  1. मानसिक और शारीरिक शोषण: तीन तलाक के बाद मूल पति से दोबारा निकाह करने (हलाला) के नाम पर महिलाओं को गैर-पुरुषों के साथ संबंध बनाने पर मजबूर किया जाता है, जो सीधे तौर पर आपराधिक शोषण की श्रेणी में आता है।

  2. कानूनी अधिकारों से वंचित करना: मुस्लिम महिलाओं को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने से धर्म और सामाजिक बहिष्कार का डर दिखाकर रोका जाता है।

  3. संगठित सिंडिकेट: इस जांच से स्पष्ट होता है कि हलाला का यह पूरा मामला धर्म की आड़ में चलाया जा रहा एक संगठित रैकेट (Syndicate) है।