दिल्ली में बढ़ा तनाव: CJP के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान झड़पें; केंद्र सरकार ने शुरू की बातचीत
नई दिल्ली — संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राष्ट्रीय राजधानी में भारी तनाव देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बहुचर्चित ‘संसद चलो’ मार्च के कारण लुटियंस दिल्ली में व्यापक व्यवधान पैदा हुआ, जिसके बाद भारी सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा और प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं।
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले और परीक्षा सुधारों की मांग को लेकर हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे। स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने के लिए पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
झड़पें, हिरासत और मेट्रो स्टेशनों के बंद होने से मचा हड़कंप
सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछारें (वाटर कैनन) कीं और हल्का लाठीचार्ज किया।
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घायल होने के दावे और आरोप: दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की ओर से कथित तौर पर किए गए पथराव में कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। दूसरी ओर, CJP नेतृत्व ने पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी सहित कई शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का पूरी तरह खंडन किया है, जिसमें 12 वर्षीय बच्ची के गंभीर रूप से घायल होने का दावा किया जा रहा था।
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यात्रियों की मुसीबत: सुरक्षा कारणों के चलते दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को राजीव चौक और पटेल चौक समेत पांच प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने पड़े। इस अचानक फैसले से सैकड़ों यात्री फंस गए, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी मेट्रो परिसर के अंदर घुसकर नारेबाजी करते नजर आए।
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गुजरात में भी प्रदर्शन: दिल्ली में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास से CJP के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा, गुजरात के अहमदाबाद सहित कई शहरों में भी एकजुटता प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस ने बिना अनुमति के इकट्ठा होने पर कई लोगों को हिरासत में लिया।
केंद्र सरकार ने की बातचीत की पहल: रखी गईं 3 मुख्य मांगें
तनाव को कम करने और स्थिति को सामान्य बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बातचीत की पहल की। CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के आवास पर दोपहर करीब 12 बजे से एक लंबी बैठक की।
इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को एक लिखित याचिका सौंपी, जिसमें उनकी तीन मुख्य मांगें शामिल हैं:
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा या उन्हें पद से बर्खास्त किया जाए।
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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए।
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NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि इन मांगों पर उचित स्तर पर चर्चा की जाएगी, लेकिन उन्होंने नेताओं से अपना धरना तुरंत समाप्त करने और कानून-व्यवस्था बहाल करने में प्रशासन की मदद करने का आग्रह किया। CJP प्रवक्ताओं का कहना है कि सरकार की तरफ से अभी कोई ठोस लिखित प्रतिबद्धता नहीं मिली है, इसलिए मांगें पूरी होने तक उनका शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा।
इस बीच, संसद परिसर में ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच करीब चार घंटे तक एक अहम बैठक चली, जिसमें इस पूरे संकट की समीक्षा की गई।
संसद में विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस विरोध प्रदर्शन की गूंज संसद के भीतर भी सुनाई दी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की कार्रवाई की तीखी आलोचना की।
“यह देश के लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है। हजारों छात्र इस मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए हैं और वहां लाठीचार्ज किया गया है। सरकार बल प्रयोग करके उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है,” खड़गे ने सदन में कहा।
वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने छात्रों और युवाओं के साथ बदसलूकी की। उन्होंने कहा कि विपक्ष मंगलवार को लोकसभा में इस मुद्दे को और राम मंदिर दान विवाद को आक्रामक तरीके से उठाएगा। इसके साथ ही, आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, आतिशी और संजय सिंह भी छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे।
अनशन खत्म, वांगचुक अस्पताल में भर्ती
सरकार के साथ बातचीत शुरू होने के बाद, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने यह फैसला सोनम वांगचुक के आग्रह पर लिया। बता दें कि वांगचुक खुद 21 दिनों के उपवास के बाद फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में उपचाराधीन हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर एक विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट मांगी है।
फिलहाल, मानसून सत्र के मद्देनजर सेंट्रल दिल्ली के हाई-सिक्योरिटी जोन में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती है और सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी गई है।
