महासमुंद जिला: ‘मोर गांव-मोर पानी 2.0’ अभियान की बड़ी सफलता, 15 दिनों में सहेजा गया 31 करोड़ लीटर वर्षा जल
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में पूरे देश के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है। समुदाय के मजबूत नेतृत्व और जनभागीदारी से चलाए गए ‘मोर गांव-मोर पानी 2.0’ अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। इस विशेष अभियान के तहत महज 15 दिनों के भीतर जिले में लगभग 31 करोड़ लीटर (310 मिलियन लीटर) वर्षा जल (Rainwater) का संचय और संरक्षण किया गया है।
विभागों के आपसी तालमेल से हुआ मुमकिन
यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और ग्रामीण जागरूकता के बेहतरीन समन्वय से संभव हो सकी है। जिला पंचायत, कृषि विभाग और वन विभाग ने आपसी तालमेल के साथ काम करते हुए जिले की 551 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 1,140 से अधिक गांवों को इस अभियान से जोड़ा। इस दौरान रिकॉर्ड समय में 3.41 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिनमें सोख्ता गड्ढे (Soak Pits), रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट, चेक डैम और तालाब शामिल हैं।
ग्राम सभाओं का बड़ा फैसला: हर घर में सोख्ता गड्ढा अनिवार्य
इस अभियान का असर अब जमीन पर स्थायी रूप से दिखने लगा है। पानी की बूंद-बूंद सहेजने और लगातार गिरते भूजल स्तर (Groundwater Level) को सुधारने के लिए ग्रामीणों ने खुद कड़ा कदम उठाया है। जिले की ग्राम सभाओं ने सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक फैसला लिया है कि अब हर घर में सोख्ता गड्ढा (Soak Pit) बनाना अनिवार्य होगा। ग्रामीणों के इस फैसले से आने वाले समय में जिले में पानी के संकट से हमेशा के लिए निजात मिलने की उम्मीद है।
