डीजल और ATF पर विंडफॉल टैक्स में भारी बढ़ोतरी, सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क घटाया; आज से नई दरें लागू
नई दिल्ली, 16 जुलाई 2026:
वैश्विक स्तर पर गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कमी को रोकने के लिए सरकार ने डीजल और एटीएफ (ATF – विमान ईंधन) पर विंडफॉल टैक्स (अप्रत्याशित लाभ कर) में भारी बढ़ोतरी कर दी है।
इसके विपरीत, घरेलू स्तर पर राहत देते हुए पेट्रोल पर लगने वाले निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ये नई दरें आज यानी 16 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई हैं।
डीजल और विमान ईंधन (ATF) पर टैक्स लगभग दोगुना
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के ऊंचे दामों से तेल कंपनियों को होने वाले मुनाफे पर नियंत्रण लगाने और घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने यह बदलाव किए हैं:
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डीजल (Diesel): डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को ₹8.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे ₹15.5 प्रति लीटर कर दिया गया है।
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ATF (विमान ईंधन): हवाई ईंधन के निर्यात शुल्क में भी तगड़ा इजाफा किया गया है। इसे अब ₹7.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹14.5 प्रति लीटर कर दिया गया है।
पेट्रोल निर्यातकों को मिली राहत
एक तरफ जहां डीजल और एटीएफ पर टैक्स बढ़ाकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल के मोर्चे पर राहत दी गई है। पेट्रोल पर लगने वाले निर्यात शुल्क (Export Duty) को घटाकर ₹2.5 प्रति लीटर कर दिया गया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य टकराव की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ऐसे में भारतीय तेल कंपनियां घरेलू बाजार में तेल बेचने के बजाय विदेशी बाजारों में निर्यात कर अधिक मुनाफा कमाने की कोशिश कर सकती हैं। घरेलू बाजार में डीजल और हवाई ईंधन की किल्लत न हो, इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए विंडफॉल टैक्स बढ़ाने का रणनीतिक फैसला लिया है।
