छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन पर CAG का बड़ा खुलासा: 33% नल कनेक्शन बंद, केवल 716 गांव ही प्रमाणित; डिप्टी सीएम अरुण साव बोले- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
रायपुर: छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बेहद गंभीर और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में कागजों पर तो बड़ी-बड़ी योजनाएं और पानी की टंकियां बांट दी गईं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट और बेहद चिंताजनक है।
इस गंभीर मामले पर छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री श्री अरुण साव का बड़ा बयान सामने आया है।
CAG रिपोर्ट के मुख्य और बड़े खुलासे
कैग (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत हुए कार्यों में कई बड़ी वित्तीय और प्रशासनिक खामियां उजागर हुई हैं:
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33% नल कनेक्शन बंद: राज्य में इस मिशन के तहत लगाए गए कुल नल कनेक्शनों में से 33 फीसदी (एक-तिहाई) कनेक्शन वर्तमान में पूरी तरह बंद या ठप पड़े हैं। यानी करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों के घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है।
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कागजों में बांटी गईं टंकियां: जांच में सामने आया है कि कई ग्रामीण इलाकों में पानी की टंकियों का वितरण और उनका निर्माण केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित रहा, जबकि धरातल पर वे गायब हैं।
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सिर्फ 716 गांव ही प्रमाणित: छत्तीसगढ़ के कुल 19,656 गांवों में से सिर्फ 716 गांवों को ही अब तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित (Certified) किया जा सका है। यह आंकड़ा तय लक्ष्य के मुकाबले काफी पीछे है।
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अधूरी पड़ी योजनाएं: ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति से जुड़ी बड़ी जलापूर्ति योजनाएं (Multi-Village Schemes) आज भी अधूरी लटकी हुई हैं, जिससे पेयजल संकट जस का तस बना हुआ है।
डिप्टी सीएम अरुण साव का पलटवार और एक्शन की चेतावनी
इस गंभीर रिपोर्ट के सामने आते ही छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। प्रदेश के डिप्टी सीएम और पीएचई मंत्री अरुण साव ने सरकार का पक्ष रखते हुए सख्त तेवर दिखाए हैं:
“जल जीवन मिशन में अधिकांश गड़बड़ियां और काम में लेटलतीफी पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई है। उनकी लापरवाही के कारण इस महत्वपूर्ण योजना का बंटाधार हुआ।” – श्री अरुण साव, डिप्टी सीएम व पीएचई मंत्री
साय सरकार करेगी सख्त कार्रवाई: डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। योजना में हुई किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसके साथ ही, पीएचई विभाग के अधिकारियों को तत्काल निर्देश जारी कर बंद पड़े 33% नल कनेक्शनों को दोबारा चालू करने और अधूरी पड़ी परियोजनाओं को मिशन मोड पर पूरा करने के लिए कहा गया है।
