धार भोजशाला मामला: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक से इनकार; मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए जगह देने का निर्देश

नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश के बेहद चर्चित और संवेदनशील धार भोजशाला मामले (Dhar Bhojshala Case) में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने संतुलन बनाए रखने के लिए निर्देश दिया है कि भोजशाला परिसर में मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने के लिए उचित और सुरक्षित जगह मुहैया कराई जाएगी।

मुस्लिम पक्ष की दलीलें: “बरसों पुरानी व्यवस्था और सौहार्द न बिगड़े”

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे देश के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के सामने कई महत्वपूर्ण तर्क रखे:

  • धार्मिक सौहार्द का उदाहरण: सिंघवी ने कहा कि धार भोजशाला में वसंत पंचमी पर हिंदुओं द्वारा पूजा और हर शुक्रवार को मुस्लिमों द्वारा नमाज की व्यवस्था बरसों से चली आ रही है। यह धार्मिक सौहार्द का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे अचानक बदलना ठीक नहीं होगा।

  • ऐतिहासिक दस्तावेज: उन्होंने दलील दी कि अंग्रेजों के जमाने के ऐतिहासिक दस्तावेज भी यह प्रमाणित करते हैं कि इस परिसर में लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है।

  • मूर्ति को लेकर स्पष्टीकरण: कोर्ट को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में परिसर के भीतर कोई स्थायी मूर्ति स्थापित नहीं है, बल्कि प्रतिदिन कार्डबोर्ड (गत्ते) पर बनी तस्वीर लाकर वहां पूजा की जाती है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक पुरानी स्थिति (Status Quo) बहाल रहनी चाहिए।

केंद्र सरकार का पक्ष: “क्षेत्र में पूरी तरह शांति व्यवस्था कायम”

वहीं दूसरी तरफ, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को जमीनी और प्रशासनिक स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि हाईकोर्ट के आदेश को आए दो महीने का समय बीत चुका है और स्थानीय प्रशासन ने आदेश के अनुरूप सभी जरूरी कदम उठाए हैं। सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में भोजशाला परिसर और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र में हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और शांति व्यवस्था कायम है।