छत्तीसगढ़ महिला आयोग में ‘कुर्सी’ की जंग: किरणमयी नायक बोलीं- हाईकोर्ट के अंतिम फैसले तक मैं ही अध्यक्ष; नवनियुक्त अध्यक्ष ममता साहू बोलीं- मुहूर्त देखकर लूंगी पदभार

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद को लेकर छिड़ा विवाद अब बेहद दिलचस्प और कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। वर्तमान अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और राज्य सरकार द्वारा नवनियुक्त अध्यक्ष ममता साहू आमने-सामने आ गई हैं। दोनों पक्षों के बीच चल रही इस ‘कुर्सी की जंग’ ने राजधानी रायपुर के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

किरणमयी नायक का दावा: “नई नियुक्ति कोर्ट की अवमानना होगी”

डॉ. किरणमयी नायक ने साफ कहा है कि यह मामला अभी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित है और जब तक अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक राज्य सरकार इस पद पर किसी अन्य की नियुक्ति को प्रभावी नहीं कर सकती।

  • कार्यकाल का गणित: किरणमयी नायक के मुताबिक, उनका पहला कार्यकाल 23 जुलाई 2020 से 22 जुलाई 2023 तक रहा। इसके बाद दूसरा कार्यकाल 21 जुलाई 2023 से 20 जुलाई 2026 तक के लिए है।

  • हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर: उन्होंने याद दिलाया कि 15 दिसंबर 2023 को भी सरकार ने उन्हें हटाने का आदेश जारी किया था, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने उस आदेश पर स्थगन (Stay) दिया था और केस अब भी पेंडिंग है।

  • अंतिम निराकरण जरूरी: किरणमयी नायक का कहना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर नई नियुक्ति को जबरन लागू किया गया, तो यह न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) होगी। इसलिए पहले हाईकोर्ट से पूरे मामले का फैसला होना चाहिए।

ममता साहू का पलटवार: “लंबित मामला और स्टे ऑर्डर अलग बातें हैं”

दूसरी तरफ, राज्य सरकार द्वारा नवनियुक्त अध्यक्ष ममता साहू ने किरणमयी नायक के दावों को खारिज कर दिया है। ममता साहू ने कहा कि किरणमयी नायक का कार्यकाल 12 जुलाई को ही समाप्त हो चुका है।

उन्होंने बेहद तल्ख अंदाज में कहा, “किरणमयी नायक भी वकील हैं और मैं भी वकील हूं। लंबित मामला होना और स्टे ऑर्डर होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। जब तक न्यायालय की ओर से नई नियुक्ति पर कोई विपरीत आदेश या रोक नहीं आती, तब तक सरकार का आदेश पूरी तरह प्रभावी है।” ममता साहू ने स्पष्ट किया कि वे सरकार के आदेश के मुताबिक तय तिथि और शुभ मुहूर्त देखकर अपना पदभार ग्रहण करेंगी।


डॉ. किरणमयी नायक ने गिनाईं 6 साल की उपलब्धियां

पद को लेकर चल रहे विवाद के बीच डॉ. किरणमयी नायक ने अपने 6 साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक बताया:

  • रिकॉर्ड निराकरण: 6 वर्षों में आयोग के पास 6,463 सुनवाई योग्य मामले आए, जिनमें से 6,184 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इसके लिए 416 जनसुनवाई की गईं।

  • मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ: डीएमएफ (DMF) फंड की मदद से 23 जिलों के 872 गांवों और ब्लॉकों में यह रथ चलाया गया, जिससे लाखों महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

  • वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम: साल 2020 में छत्तीसगढ़ महिला आयोग का नाम ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज हुआ। कोविड-19 काल में बेहतरीन जनसुनवाई के लिए 2021 में विशेष सम्मान भी मिला।

  • ऐतिहासिक फैसले: नगरनार की 71 बेटियों को नौकरी दिलाना, एक पीड़िता को 67 तोला सोना व करीब 20 किलो चांदी वापस दिलाना, 15 से अधिक मामलों में डीएनए (DNA) टेस्ट और एक मामले में नार्को टेस्ट कराना उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।

अब देखना यह होगा कि क्या नवनियुक्त अध्यक्ष ममता साहू बिना किसी कानूनी अड़चन के पदभार संभाल पाती हैं, या यह मामला एक बार फिर हाईकोर्ट के गलियारों में और अधिक उलझ जाता है।