छत्तीसगढ़ में बड़ा फैसला: गैर-मुस्लिम से निकाह के लिए अब लेनी होगी इजाजत, मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन भी होगा अनिवार्य
रायपुर, 6 जुलाई 2026।
छत्तीसगढ़ के मुस्लिम समाज और विभिन्न मुस्लिम तंजीमों (संगठनों) द्वारा सामाजिक व्यवस्था और निकाह के नियमों को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। इस नई व्यवस्था और कड़े नियमों को आगामी अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है।
निकाह के लिए लेनी होगी आधिकारिक अनुमति
नई गाइडलाइन और व्यवस्था के तहत यदि छत्तीसगढ़ का कोई भी मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम (दूसरे धर्म के साथी) से निकाह करना चाहता है, तो उसे निकाह से पहले समाज और जिम्मेदार संस्थाओं से आधिकारिक तौर पर अनुमति (इजाजत) लेनी होगी। बिना पूर्व अनुमति के ऐसे निकाह संपन्न नहीं कराए जाएंगे।
सभी मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
इस फैसले के सुचारू क्रियान्वयन और पारदर्शिता के लिए राज्य भर में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है:
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पंजीकरण अनिवार्य: छत्तीसगढ़ के सभी शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में निकाह पढ़ाने वाले सभी मौलानाओं का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) अनिवार्य किया जा रहा है।
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अवैध निकाह पर रोक: तंजीमों का मानना है कि इस कदम से बिना जानकारी या पहचान छुपाकर होने वाले निकाहों पर रोक लगेगी और रिकॉर्ड पूरी तरह व्यवस्थित रहेगा।
‘लव जिहाद’ और सामाजिक विवादों को रोकने की पहल
मुस्लिम तंजीमों और सामाजिक पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में अंतरधार्मिक विवाहों के कारण कई तरह के सामाजिक विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थितियां निर्मित होती हैं। समाज के प्रतिनिधियों के मुताबिक, यह कदम ‘लव जिहाद’ जैसी कथित घटनाओं, जबरन धर्मांतरण के आरोपों और आपसी सामाजिक टकरावों को रोकने तथा समाज में शांति व सौहार्द बनाए रखने की दिशा में एक निवारक पहल है।
अगस्त से लागू होने वाले इस फैसले को लेकर अब जमीनी स्तर पर मुस्लिम समाज के भीतर तैयारी और जागरूकता अभियान शुरू करने की बात कही जा रही है।
