बंगाल में बड़ा सियासी घमासान: TMC का बागी गुट आज दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलेगा, ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस होने का ठोकेगा दावा
02 जुलाई 2026। पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंदरूनी संकट अब देश के निर्वाचन सदन (Election Commission) के दरवाजे तक पहुंच गया है। टीएमसी के बागी धड़े के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधायकों का एक 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज दोपहर 12 बजे नई दिल्ली में चुनाव आयोग की फुल बेंच से मुलाकात करेगा।
इस बागी गुट ने खुद को “असली” तृणमूल कांग्रेस बताते हुए आयोग से नई कार्यकारिणी को मान्यता देने और पार्टी के नाम व आधिकारिक ‘दो फूलों’ वाले चुनाव चिन्ह (Twin-Flower Symbol) पर अपना अधिकार जताने की मांग की है।
क्यों अलग हुआ बागी गुट? समझिए पूरा समीकरण
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष की चिंगारी सुलग रही थी, जो अब एक बड़ी बगावत में बदल चुकी है। इस राजनीतिक संकट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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विधायकों का बड़ा समर्थन: टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से बागी गुट लगभग 60 से 65 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है, जो एंटी-डिफेक्शन कानून (दलबदल कानून) से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से ज्यादा है।
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ममता बनर्जी को पद से हटाया: बीते 22 जून को कोलकाता में आयोजित एक विशेष सत्र के दौरान बागी गुट ने पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष घोषित कर दिया था।
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पार्टी फंड पर भी दावा: पार्टी के नाम और सिंबल के साथ-साथ इस बागी गुट ने बैंक खातों में जमा करीब ₹440 करोड़ के पार्टी फंड पर भी अपना दावा ठोका है। विवाद के चलते फिलहाल इन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।
चुनाव आयोग के सामने क्या रखेंगे मांग? (Table)
बागी गुट के नेता रितब्रत बनर्जी के मुताबिक, वे चुनाव आयोग के सामने सिंबल ऑर्डर, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत कानूनी दस्तावेज पेश करेंगे।
| बागी गुट का दावा / पक्ष | वर्तमान स्थिति |
| विधायी दल में बहुमत | विधानसभा में 80 में से ~64 विधायकों का समर्थन प्राप्त होने का दावा। |
| संसदीय दल में बिखराव | लोकसभा के 28 में से 20 सांसदों के भी अलग रुख अपनाने की खबरें। |
| संगठनात्मक बदलाव | नया राष्ट्रीय कार्यसमिति (NWC) गठित कर चुनाव आयोग को इसकी सूचना दी गई है। |
“हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और हमारे पास पर्याप्त संख्या बल है। हमने संगठन में लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव किए हैं और इसकी पूरी जानकारी हम आज चुनाव आयोग की फुल बेंच के सामने रखेंगे।”
— रितब्रत बनर्जी, नेता प्रतिपक्ष, पश्चिम बंगाल विधानसभा
दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला खेमा इस पूरी बगावत को अवैध और विपक्षी दलों द्वारा प्रायोजित बता रहा है। टीएमसी की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डोला सेन ने इस मामले में जालसाजी और धोखाधड़ी की पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई है। अब देखना होगा कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चुनाव आयोग इस पर क्या फैसला लेता है।
