मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: मैतेई विवाद के बाद अब कुकी और नगा समुदाय में खूनी भिड़ंत, 1992 जैसे संघर्ष का लौटा खौफ

इम्फाल, 25 जून 2026: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर पिछले एक साल से अधिक समय से सुलग रहा है, लेकिन अब राज्य में एक और नया और बेहद खतरनाक मोर्चा खुल गया है। मैतेई (Meitei) और कुकी (Kuki) विवाद के बाद अब राज्य के पहाड़ी जिलों में कुकी और नगा (Naga) समुदाय आपस में भिड़ गए हैं। इस नए जातीय टकराव ने राज्य की कानून-व्यवस्था को एक बार फिर पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।

6 नगा नागरिकों के क्षत-विक्षत शव मिलने से भड़का गुस्सा

ताजा हिंसा की शुरुआत पिछले दिनों दोनों समुदायों के बीच शुरू हुए बंधक संकट (Hostage Crisis) के बाद हुई। हाल ही में सुरक्षा बलों को लेलोन वाइफेई (Leilon Vaiphei) इलाके से अगवा किए गए 6 नगा नागरिकों के क्षत-विक्षत और कटे-फटे शव बरामद हुए, जिनमें चर्च के पादरी भी शामिल थे। इस दर्दनाक घटना के सामने आने के बाद नगा बहुल इलाकों में भारी आक्रोश फैल गया और देखते ही देखते यह तनाव हिंसक झड़पों में बदल गया।

शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस नए मोर्चे पर अब तक अलग-अलग हिंसक वारदातों में करीब 20 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि उग्रवादियों द्वारा 50 से अधिक घरों और सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया है।

लौट आया 1992 के नगा-कुकी गृहयुद्ध का खौफ

इस भीषण टकराव के चलते स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों में एक बार फिर साल 1992 के भयानक नगा-कुकी संघर्ष की यादें ताजा हो गई हैं। उस दौर में जमीन और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर दोनों ईसाई समुदायों के बीच हुए खूनी गृहयुद्ध में 1,400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। मौजूदा हालातों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि यदि वक्त रहते इस पर काबू नहीं पाया गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।

सुरक्षा बल अलर्ट, इंफाल से लेकर पहाड़ी जिलों तक तनाव

6 नगा नागरिकों की हत्या के विरोध में नगा संगठनों (जैसे यूनाइटेड नगा काउंसिल – UNC) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। हिंसा प्रभावित इलाकों में असम राइफल्स, सीआरपीएफ और मणिपुर पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। कई इलाकों में सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ की भी खबरें हैं। नेशनल हाईवे पर आर्थिक नाकेबंदी (Economic Blockade) के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, जिससे आम जनता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।