अंतरराष्ट्रीय: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘पीस डील’ पर डिजिटल हस्ताक्षर; 19 जून को जेनेवा में लगेगी अंतिम मुहर

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक बेहद युगांतरकारी और बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने वैश्विक राजनीति को नया मोड़ देते हुए एक ऐतिहासिक ‘पीस डील’ (शांति समझौते) पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर (Digital Sign) कर दिए हैं। इस अप्रत्याशित कदम के बाद मध्य-पूर्व (Middle East) सहित दुनिया भर के देशों में हलचल तेज हो गई है।

19 जून को जेनेवा में होगा औपचारिक समारोह

डिजिटल सहमति बनने के बाद अब इस समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी पूरी हो चुकी है। आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में एक उच्च स्तरीय औपचारिक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जहाँ दोनों पक्षों के शीर्ष प्रतिनिधि इस समझौते पर व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षर करेंगे।

ईरान को मिलेगी ₹28 लाख करोड़ की भारी-भरकम वित्तीय सहायता

इस रणनीतिक समझौते के तहत आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ी सहमति बनी है। सूत्रों के मुताबिक, इस पीस डील के प्रावधानों के तहत अमेरिका, ईरान को लगभग ₹28 लाख करोड़ (लगभग $335+ बिलियन) की भारी-भरकम वित्तीय सहायता पैकेज दे सकता है। इस राशि का मुख्य उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लाना और वैश्विक व्यापार के मुख्यधारा में उसे शामिल करना है।

वैश्विक प्रतिक्रिया: फ्रांस ने किया स्वागत, इजराइल ने जताई कड़ी आपत्ति

इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर दुनिया के दिग्गज नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं:

  • फ्रांस का रुख: G7 समिट के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कदम की पुरजोर सराहना की। उन्होंने कहा, “यह समझौता विश्व शांति और वैश्विक स्थिरता की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम है।”

  • इजराइल की कड़ी चेतावनी: दूसरी ओर, इस समझौते से इजराइल बेहद असहज नजर आ रहा है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में चेतावनी दी है। नेतन्याहू ने कहा, “यह डील हो या न हो, इजराइल अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा और वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा।”

निष्कर्ष: अमेरिका और ईरान की यह डिजिटल पीस डील वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जा रही है। अब पूरी दुनिया की नजरें 19 जून को जेनेवा में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि मध्य-पूर्व में शांति का यह नया अध्याय कितना टिकाऊ साबित होता है।