एमपी में बदलेगा 58 साल पुराना जेल मैनुअल: आदतन अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार
भोपाल: मध्य प्रदेश की जेल व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में करीब 58 साल पुराना जेल मैनुअल (Jail Manual) अब इतिहास बनने जा रहा है। राज्य सरकार जेलों के प्रबंधन को आधुनिक बनाने और सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य करने के लिए नए नियमों का एक व्यापक ड्राफ्ट तैयार कर चुकी है।
इस बड़े प्रशासनिक सुधार के तहत जेलों में बंद कैदियों के सुधार और आदतन अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कड़े प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं।
आदतन अपराधियों (Habitual Criminals) के लिए कड़े नियम
संशोधित जेल मैनुअल में सबसे बड़ा प्रहार उन अपराधियों पर किया गया है जो बार-बार अपराध की दुनिया में लौट आते हैं। नए नियमों के अनुसार:
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सख्त कस्टडी: ऐसे अपराधी जिन्होंने पिछले 5 साल के भीतर दो बार सजा पाई है, उन्हें ‘आदतन अपराधी’ की श्रेणी में रखकर उनके लिए जेल के नियम बेहद कड़े किए जाएंगे।
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कम मिलेंगी रियायतें: इन कैदियों की मुलाकातों, पैरोल और अन्य मिलने वाली आम सुविधाओं पर कड़ा नियंत्रण रखा जाएगा।
जेल प्रबंधन और सुधारों का आधुनिकीकरण
58 साल पुराने नियमों में बदलाव का मुख्य उद्देश्य जेलों को केवल सजा का केंद्र न बनाकर ‘सुधार गृह’ के रूप में विकसित करना भी है।
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कैदियों का सुधार: बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य, कौशल विकास (Skill Development) और उनके पुनर्वास के लिए नए नियमों में आधुनिक प्रावधान जोड़े गए हैं।
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डिजिटलाइजेशन और सुरक्षा: जेलों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी सर्विलांस और डिजिटल रिकॉर्ड कीपिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक: पुराना मैनुअल समय के साथ अप्रासंगिक हो चुका था। आज के समय की सुरक्षा चुनौतियों और मानवाधिकारों के संतुलन को देखते हुए इस नए जेल मैनुअल को लागू करना बेहद जरूरी हो गया था।
जल्द मिलेगी कैबिनेट की मंजूरी
बताया जा रहा है कि नए जेल मैनुअल के इस ड्राफ्ट पर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर अंतिम मुहर लग चुकी है। इसे जल्द ही राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद इसे पूरे मध्य प्रदेश की केंद्रीय और जिला जेलों में एक साथ लागू कर दिया जाएगा।
