अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का आरोप: लखनऊ हाई कोर्ट में PIL दाखिल, CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग
लखनऊ/अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान राशि को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित रूप से वित्तीय अनियमितताओं और गबन (Embezzlement) के आरोपों को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इस याचिका के सामने आने के बाद प्रशासनिक और धार्मिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराने के लिए देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों को शामिल करने की गुहार लगाई है।
CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग
दाखिल की गई जनहित याचिका में मुख्य रूप से दो बड़ी मांगें उठाई गई हैं:
-
CAG ऑडिट: मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाले दान, गुप्त दान और संपत्तियों का पूरा मूल्यांकन भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General – CAG) से कराने की मांग की गई है।
-
CBI जांच: चढ़ावे के प्रबंधन और कथित हेरफेर के आरोपों की गहराई से जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने का आदेश देने का अनुरोध किया गया है।
क्या हैं याचिका में लगाए गए आरोप?
याचिका में दावा किया गया है कि रामलला के दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने, चांदी और नकदी के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी है। आरोपों के मुताबिक, दान में मिली कुछ राशियों और बहुमूल्य सामग्रियों के विवरण में विसंगतियां हैं, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होना बेहद जरूरी है ताकि भक्तों की आस्था और पैसे का दुरुपयोग न हो।
याचिका का मुख्य बिंदु: राम मंदिर देश के करोड़ों नागरिकों की आस्था का केंद्र है। यहाँ आने वाले एक-एक पैसे और चढ़ावे का हिसाब पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए। वित्तीय गबन के आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
कोर्ट के रुख पर टिकी नजरें
लखनऊ हाई कोर्ट में इस जनहित याचिका पर आने वाले दिनों में सुनवाई हो सकती है। कोर्ट इस मामले को स्वीकार करता है या ट्रस्ट का पक्ष जानने के लिए नोटिस जारी करता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। दूसरी ओर, मंदिर प्रबंधन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट का पूरा हिसाब-किताब पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी है, और इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
