पेट्रोल-डीजल पर सरकार का नया नियम: पेट्रोल पंपों से बल्क खरीद पर 90 दिनों की रोक, 20% एथेनॉल वाले फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी हुई शून्य
नई दिल्ली, 12 जून 2026। केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री तथा वितरण व्यवस्था को लेकर दो बेहद बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों का ऐलान किया है। सरकार द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब पेट्रोल पंपों से बल्क यूजर्स (थोक खरीदारों) द्वारा की जाने वाली ईंधन की खरीद पर अगले 90 दिनों के लिए पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, पर्यावरण अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 20% से अधिक एथेनॉल मिक्स वाले पेट्रोल को पूरी तरह से ड्यूटी-फ्री (उत्पाद शुल्क शून्य) कर दिया है।
सरकार के इस कदम से जहां खुदरा और थोक ईंधन बाजार की व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा, वहीं एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) प्रोग्राम को भी भारी गति मिलेगी।
पेट्रोल पंपों से थोक खरीद पर 90 दिनों का बैन
सरकार के नए आदेश के मुताबिक, अब बस ऑपरेटर, बड़े कारखाने, रेलवे या अन्य कोई भी बड़े थोक खरीदार (Bulk Users) आम पेट्रोल पंपों से सीधे डीजल या पेट्रोल नहीं खरीद सकेंगे। यह पाबंदी शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है।
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अब कहां से मिलेगा ईंधन: सभी थोक खरीदारों को अपनी जरूरत का ईंधन अब केवल तेल कंपनियों के अधिकृत थोक आपूर्ति केंद्रों (Authorized Bulk Supply Centers) से ही खरीदना होगा।
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फैसले का कारण: माना जा रहा है कि आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंपों पर ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और खुदरा कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
20% से अधिक एथेनॉल मिक्स पेट्रोल पर अब ‘शून्य एक्साइज ड्यूटी’
ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भर भारत अभियान को रफ्तार देते हुए सरकार ने एक और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब देश में 20% या उससे अधिक एथेनॉल मिश्रण (E20+ Fuel) वाले पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को घटाकर शून्य कर दिया गया है।
इस फैसले के बड़े मायने हैं:
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सस्ता हो सकता है ग्रीन फ्यूल: एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह हटने से आने वाले समय में अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग वाला पेट्रोल आम जनता के लिए सस्ता हो सकता है।
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कच्चे तेल पर घटेगी निर्भरता: टैक्स छूट मिलने से तेल कंपनियां एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उत्पादन और बिक्री को तेजी से बढ़ावा देंगी, जिससे भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।
सरकार के इन दोनों फैसलों का सीधा असर तेल विपणन कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) के कामकाज और देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ने वाला है।
