रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: डॉलर के मुकाबले 96.4 के सर्वकालिक न्यूनतम स्तर पर फिसला भारतीय करेंसी, लगातार सातवें दिन गिरावट

भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा बाजार से इस वक्त की एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (International Tensions) और कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल के बीच भारतीय रुपया (Indian Rupee) आज लगातार सातवें कारोबारी दिन टूट गया। भारी बिकवाली के दबाव में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.4 प्रति डॉलर के नए सर्वकालिक निचले स्तर (All-time low) पर जाकर बंद हुआ है।

क्यों टूट रहा है भारतीय रुपया?

बाजार विश्लेषकों और आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, रुपए में आ रही इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण हैं:

  1. कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में लगातार तेजी आ रही है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपए पर दबाव भारी है।

  2. अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक संकट: अमेरिका-ईरान संकट और वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (जैसे भारत) से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे डॉलर और सोना) की तरफ रुख कर रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की इस लगातार बिकवाली ने रुपए को कमजोर कर दिया है।

लगातार सातवें दिन दर्ज की गई गिरावट

फॉरेक्स बाजार (Forex Market) में आज सुबह से ही रुपए में कमजोरी देखी जा रही थी। घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने रुपए की रिकवरी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। यह लगातार सातवां सत्र है जब भारतीय करेंसी में गिरावट दर्ज की गई है, जो घरेलू बाजार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

आम जनता पर क्या होगा इसका असर?

रुपए के रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाने से देश में आयात (Import) होने वाली चीजें महंगी हो सकती हैं।

  • महंगाई का खतरा: कच्चा तेल महंगा होने से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और सीधा असर आम जरूरत की चीजों पर पड़ेगा।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेशी पढ़ाई: विदेशों से आयात होने वाले स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा, जो छात्र विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं, उनका खर्च भी अब पहले से अधिक बढ़ जाएगा।

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