ऊर्जा सप्लाई और प्रतिबंधों को लेकर बयानबाज़ी तेज, वैश्विक बाजारों पर असर
Russian President Vladimir Putin (R) and US President Donald Trump are pictured before a meeting in Helsinki, on July 16, 2018. (Photo by Brendan Smialowski / AFP) (Photo credit should read BRENDAN SMIALOWSKI/AFP via Getty Images)
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर रूस और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। ऊर्जा सप्लाई, आर्थिक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक नीतियों को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाज़ी सामने आई है। इस बढ़ते टकराव का असर केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका प्रभाव ऊर्जा कीमतों, व्यापार मार्गों और निवेशकों की धारणा पर गहराई से पड़ सकता है।
ऊर्जा सप्लाई बना विवाद का केंद्र
रूस विश्व के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों में शामिल है और कई देशों को तेल एवं गैस की आपूर्ति करता है। हाल के घटनाक्रम में ऊर्जा सप्लाई को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
अमेरिका का आरोप है कि रूस:
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ऊर्जा संसाधनों का राजनीतिक हथियार की तरह उपयोग कर रहा है
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कुछ क्षेत्रों में सप्लाई सीमित कर दबाव बना रहा है
वहीं रूस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि:
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वह केवल व्यावसायिक और अनुबंध आधारित आपूर्ति कर रहा है
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प्रतिबंधों के कारण सप्लाई में बाधा आ रही है, जिसकी जिम्मेदारी पश्चिमी देशों की है
प्रतिबंधों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया
अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध इस तनाव की एक बड़ी वजह माने जा रहे हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस की आर्थिक और रणनीतिक क्षमताओं को सीमित करना बताया जा रहा है।
रूस का कहना है कि:
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प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ हैं
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इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है
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आम जनता और ऊर्जा बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं
इसके जवाब में अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों को राजनीतिक दबाव का वैध साधन माना जाना चाहिए।
कूटनीतिक बयानबाज़ी में तेज़ी
हाल के दिनों में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के बयान लगातार सुर्खियों में हैं।
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रूस ने अमेरिका पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया
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अमेरिका ने रूस की नीतियों को वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बताया
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की बयानबाज़ी तनाव को और बढ़ा सकती है और बातचीत की संभावनाओं को कमजोर कर सकती है।
वैश्विक बाजारों पर दिखा असर
रूस–अमेरिका तनाव का सीधा असर वैश्विक वित्तीय और ऊर्जा बाजारों पर देखने को मिला है।
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कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव
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शेयर बाजारों में अस्थिरता
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सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव
निवेशक अनिश्चितता के माहौल में सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे कई बाजारों में सीमित दायरे में कारोबार देखा गया।
यूरोप और अन्य देशों की चिंता
इस तनाव का असर यूरोप और अन्य ऊर्जा-निर्भर देशों पर भी पड़ रहा है। यूरोपीय देशों को रूस से बड़ी मात्रा में गैस की आपूर्ति होती है, ऐसे में किसी भी तरह की रुकावट उनकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
कई देशों ने:
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वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान बढ़ाया है
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ऊर्जा भंडारण रणनीतियों की समीक्षा की है
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कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है
विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह तनाव केवल दो देशों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका दायरा वैश्विक है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
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लंबे समय तक तनाव से वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ सकता है
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ऊर्जा कीमतों में स्थायी बढ़ोतरी संभव है
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कूटनीतिक संवाद ही स्थायी समाधान का रास्ता है
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह तनाव किस दिशा में जाएगा। आने वाले समय में:
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नए प्रतिबंधों की घोषणा संभव है
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ऊर्जा नीतियों में बदलाव हो सकता है
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बातचीत के प्रयास तेज़ हो सकते हैं
यदि दोनों पक्ष बातचीत की मेज़ पर आते हैं, तो स्थिति में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है।
रूस और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर यह दर्शाता है कि भू-राजनीतिक टकराव का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। ऊर्जा सप्लाई और प्रतिबंधों को लेकर जारी बयानबाज़ी ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश कूटनीतिक रास्ते से समाधान की ओर बढ़ते हैं या यह तनाव आने वाले दिनों में और गहराता है।
