PM से बस्तर विकास पर CM साय की अहम मुलाकात: बोधघाट प्रोजेक्ट और नक्सल ऑपरेशन पर चर्चा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शनिवार को दिल्ली दौरे के बाद रायपुर लौटे। वहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बीते 13 दिनों में यह उनकी दूसरी बैठक रही, जिसमें बस्तर के विकास और सुरक्षा को प्रमुखता से रखा गया।

इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं — बोधघाट सिंचाई परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट — की जानकारी दी और इन्हें राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा अभियानों और विकास प्रयासों की रिपोर्ट भी सौंपी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बस्तर की पहचान बन चुके बेलमेटल से बने एक विशेष नंदी की प्रतिमा भेंट की। इसमें भगवान गणेश का चेहरा और सींगों की जगह “ॐ” की आकृति थी। प्रधानमंत्री ने इसे “अरे वाह” कहते हुए सराहना के साथ स्वीकार किया।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में सिंचाई की बहुत कमी है। यहां 8.15 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में से केवल 1.36 लाख हेक्टेयर में ही सिंचाई सुविधा है।

उन्होंने कहा कि:

  • बोधघाट परियोजना से दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 269 गांवों को सीधा लाभ होगा।

  • इससे 3.78 लाख हेक्टेयर में सिंचाई, 125 मेगावाट बिजली उत्पादन, 49 मि.घ.मी. पेयजल, और 4824 मीट्रिक टन मछली उत्पादन की संभावना है।

  • इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट से कांकेर सहित 3 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होगी।

  • दोनों योजनाओं से कुल 7 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी।

बस्तर में हो रहे हैं बदलाव

CM साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि बस्तर, जो कभी नक्सलवाद और बारूदी सुरंगों के लिए जाना जाता था, अब वहां मोबाइल टावर, सड़कें और विकास की तस्वीर उभर रही है।

  • पिछले डेढ़ साल में 64 फॉरवर्ड सुरक्षा कैंप स्थापित हुए हैं।

  • 671 मोबाइल टावर चालू, जिनमें से 365 पर 4G सुविधा है।

  • 146 ग्रामों में नियद नेल्लानार योजना के तहत 18 सामुदायिक सेवाएं और 25 सरकारी योजनाएं क्रियान्वित हो रही हैं।

  • बारिश के दिन घटने से सरकार GIS मैपिंग और जलदूत ऐप के माध्यम से जल संरक्षण पर ध्यान दे रही है।

नालंदा परिसर और प्रयास मॉडल पर चर्चा

CM ने प्रधानमंत्री को बताया कि रायपुर का नालंदा परिसर देश की पहली 24×7 हाइब्रिड पब्लिक लाइब्रेरी है, जहां 18 करोड़ की लागत से ई-लाइब्रेरी, यूथ टॉवर, हेल्थ जोन और सौर ऊर्जा की सुविधा है।

अब तक 11,000 से अधिक छात्र लाभांवित हो चुके हैं, जिनमें से 300 से अधिक UPSC व CGPSC में चयनित हुए हैं।

साथ ही ‘प्रयास मॉडल’ के तहत वंचित और आदिवासी छात्रों को IIT, NEET, CLAT जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है, जिसमें 1508 छात्र राष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश पा चुके हैं।

पुरानी योजना को मिल रही नई गति

बोधघाट परियोजना की शुरुआत 1979 में पर्यावरणीय मंजूरी से हुई थी, लेकिन जनजातीय हितों और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते यह अधर में रह गई। अब इसे सिंचाई परियोजना के रूप में पुनः परिभाषित किया गया है।

हालांकि इसमें भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव, जैवविविधता और वन क्षेत्र के नुकसान को लेकर कुछ आपत्तियाँ हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय से अब इसे गति मिलने की संभावना है।