अमरकंटक और पुष्पराजगढ़ में सर्दी का कहर: कड़ाके की ठंड ने बढ़ाई मुश्किलें!

उत्तर भारत की सर्द हवाओं ने अनूपपुर जिले के लोगों को कड़ाके की ठंड का अनुभव करवा दिया है। सतपुड़ा मैकल अंचल की पहाड़ी वादी पर स्थित अमरकंटक, जो अपनी ठंड के लिए प्रसिद्ध है, इन दिनों में बर्फ जैसी सर्दी महसूस हो रही है।

बुधवार की तरह गुरुवार की सुबह भी यहां की धरा पर घास पर ओस की बूंदें जमा हुईं। इस दिन यहां का न्यूनतम तापमान महज 3 डिग्री दर्ज किया गया। अमरकंटक के नर्मदा मंदिर उद्गम कुंड से लेकर रामघाट और कपिलधारा तक के मैदानी क्षेत्र में नर्मदा तट के किनारे घास पूरी तरह सफेद हो गई थी, जो सुबह करीब सात बजे तक रही। वाहनों की छतों पर भी ओस जमी हुई थी।

यहां की सर्दी का असर सुबह और शाम में ज्यादा महसूस हो रहा है। लोग अलाव जलाते हुए नजर आ रहे हैं, और हल्की कोहरे की धुंध भी देखी जा रही है। सुबह के समय चार पहिया वाहनों पर भी ओस की परत चढ़ गई थी। ठंड के कारण कोटि तीर्थ कुंड और रामघाट पर नर्मदा स्नान करने वालों की भी संख्या कम थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, चहल-पहल बढ़ने लगी।

अमरकंटक क्षेत्र में दिसंबर और जनवरी के महीने में ठंड सबसे ज्यादा रहती है, और यहां का न्यूनतम तापमान अक्सर 0 डिग्री से नीचे चला जाता है। इसी तरह, पुष्पराजगढ़ तहसील क्षेत्र में भी कड़ाके की ठंड बनी हुई है। यह इलाका आदिवासी बहुल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां ठंड का असर और भी अधिक रहता है। अमरकंटक के घने जंगलों और पहाड़ियों का प्रभाव इस क्षेत्र पर साफ दिखाई दे रहा है।

गुरुवार की सुबह पुष्पराजगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पौधों और घास पर सफेद ओस जमी हुई थी, जिससे ठंडी हवा और बढ़ गई थी। अमरकंटक से अनूपपुर की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है, और यहां भी ठंड का असर पिछले दो दिनों से बना हुआ है। शाम होते ही शीत लहर का प्रभाव और तेज हो जाता है, और लोग ठंडी से बचने के लिए अलाव जलाते हुए नजर आते हैं।

स्पष्ट आसमान में तापमान गिरता जा रहा है, और यह संभावना है कि आने वाले दिनों में अमरकंटक सहित जिले के तापमान में और गिरावट आ सकती है।